उत्तर प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए योगी सरकार अब सरकारी योजनाओं के असर का जिलावार आकलन कर रही है। इसके लिए नियोजन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का वूमेन इकोनॉमिक एंपावरमेंट इंडेक्स 2.0 तैयार किया है। इसके तहत महिलाओं की उद्यमिता, रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास, आजीविका और सुरक्षा से जुड़े 49 संकेतकों के आधार पर योजनाओं की प्रगति जांची जा रही है।
इस इंडेक्स में 15 विभागों से मिले आंकड़ों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ महिलाओं तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रहा है और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।
सरकारी योजनाओं में 30 प्रतिशत महिला भागीदारी का लक्ष्य
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 जुलाई 2025 को इंडेक्स के पहले संस्करण की समीक्षा के दौरान सभी विभागीय योजनाओं में महिलाओं की 30 प्रतिशत भागीदारी का लक्ष्य तय करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने सबसे कमजोर प्रदर्शन वाले पांच जिलों पर विशेष अभियान चलाने और सभी विभागों को जेंडर एक्शन प्लान तैयार करने को भी कहा था। इसी के तहत इंडेक्स के दूसरे संस्करण में 2025-26 के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।
पांच क्षेत्रों में हो रहा महिलाओं की भागीदारी का मूल्यांकन
इंडेक्स में महिला आर्थिक सशक्तीकरण को पांच प्रमुख क्षेत्रों में बांटा गया है। इसमें शिक्षा एवं कौशल विकास को 22.4 प्रतिशत, उद्यमिता को 22.1 प्रतिशत, रोजगार को 21.9 प्रतिशत, आजीविका को 17.4 प्रतिशत और आवागमन, सुरक्षा एवं समावेशी बुनियादी ढांचे को 16.1 प्रतिशत वेटेज दिया गया है।
इसके तहत ओडीओपी, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, पीएम स्वनिधि, स्वयं सहायता समूहों, आईटीआई, पॉलीटेक्निक और रोजगार मेलों जैसी योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी देखी जा रही है।
स्वयं सहायता समूहों और उद्यमिता में बढ़ी भागीदारी
ग्रामीण विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों को रिवॉल्विंग फंड देने के लक्ष्य में महिलाओं की भागीदारी 2023-24 के 38 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 65.3 प्रतिशत हो गई है। ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का अनुपात भी 24.9 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत पहुंच गया है।
एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत महिला उद्यमियों की संख्या 1.87 लाख से बढ़कर 2.90 लाख हो गई है। वहीं, ओडीओपी प्रशिक्षण एवं टूलकिट कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी 58.2 प्रतिशत से बढ़कर 63.1 प्रतिशत और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना में 49.5 प्रतिशत से बढ़कर 63.3 प्रतिशत हो गई है।
पीएम स्वनिधि में भी महिलाओं की डिजिटल भागीदारी बढ़ी
पीएम स्वनिधि योजना के तहत महिला स्ट्रीट वेंडर्स की डिजिटल भागीदारी में भी सुधार दर्ज किया गया है। 2023-24 में महिला लाभार्थियों में 54 प्रतिशत डिजिटल रूप से सक्रिय थीं, जबकि 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 69 प्रतिशत हो गया। वहीं, तीसरी किस्त का ऋण पाने वाली महिला लाभार्थियों का अनुपात 12 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत पहुंच गया है।
27 संकेतकों में सकारात्मक प्रगति
इंडेक्स में शामिल 45 संकेतकों के रुझानों के विश्लेषण में 27 पर सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई, जबकि 15 में नकारात्मक रुझान और तीन में स्थिति स्थिर रही। एमएसएमई विभाग के सभी पांच संकेतकों में सुधार देखा गया। शहरी विकास विभाग के तीनों और संस्थागत वित्त विभाग के दोनों संकेतकों में भी सकारात्मक प्रगति सामने आई है।
जिलों के प्रदर्शन पर रहेगी नजर
इंडेक्स के जरिए जिलों के प्रदर्शन की तुलना कर कमजोर क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। इसके लिए विभागीय नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, डैशबोर्ड और क्षेत्रवार जेंडर एक्शन प्लान तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। परिवहन और व्यावसायिक शिक्षा के लिए अलग-अलग कार्ययोजनाएं भी बनाई जा रही हैं।
योगी सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाने तक सीमित न रखकर उन्हें रोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और आर्थिक फैसलों में अधिक भागीदारी का अवसर देना है। जिलावार आंकड़ों की नियमित समीक्षा से योजनाओं में कमियों की पहचान कर सुधार के कदम उठाए जाएंगे।