तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में रविवार को अचानक आई बाढ़ के कारण सिंचाई नहर पर बना अस्थायी पुल बह गया। इससे 100 से अधिक परिवारों के सामने आने-जाने की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों को अब कामकाज और जरूरी गतिविधियों के लिए गांव से बाहर जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह घटना गुडुगनहल्ली के पास सौट्टाहल्ली कोट्टई गांव के नजदीक हुई। गांव तक पहुंचने वाले रास्ते में एक सिंचाई नहर पड़ती है। मानसून के दौरान नहर में पानी का बहाव बढ़ने से अक्सर गांव का संपर्क प्रभावित होता है और लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है।
ग्रामीणों ने अपनी जेब से खर्च किए थे 8 लाख रुपये
ग्रामीण लंबे समय से नहर पर स्थायी पुल बनाने की मांग कर रहे थे। हालांकि, समस्या का समाधान नहीं होने पर पिछले साल ग्रामीणों ने खुद पैसे जुटाकर करीब 8 लाख रुपये की लागत से एक अस्थायी पुल बनाया था। इसका उद्देश्य गांव के लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने में मदद देना था।
पिछले एक सप्ताह से हो रही भारी बारिश के कारण नहर में अचानक पानी का बहाव बढ़ गया। इससे बाढ़ जैसे हालात बने और पानी के तेज बहाव में अस्थायी पुल बह गया।
अब 5 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर रहे ग्रामीण
पुल टूटने के बाद गांव के लोगों का मुख्य सड़क तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। अब उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए करीब पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे यात्रा में अधिक समय लग रहा है और रोजाना काम पर जाने वाले लोगों को खास तौर पर परेशानी हो रही है।
इस घटना ने एक बार फिर मानसून के दौरान गांवों की संपर्क व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को उजागर किया है। नहर में पानी बढ़ने पर गांव तक पहुंचने वाला सीधा रास्ता बाधित हो जाता है।
स्थायी पुल बनाने की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने और पुल को दोबारा चालू कराने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि स्थायी पुल बनने से मानसून के दौरान बार-बार होने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है और गांव का संपर्क मुख्य सड़क से बना रहेगा।