Breaking News

PM मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार के परिवार से की बात, बहादुरी की सराहना     |   अफगानिस्तान में सुबह-सुबह भूकंप के झटके, 5.3 रही तीव्रता     |   मुंबई एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की क्षमता का बड़ा हिस्सा आज से नवी मुंबई एयरपोर्ट शिफ्ट होगा     |   आंध्र प्रदेश में नई एक्साइज शॉप पॉलिसी आज से लागू, शराब दुकानों की व्यवस्था बदलेगी     |   यूपी में बिना PUC सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, NCR में प्रदूषण 35% घटाने का लक्ष्य     |  

सावन के पावन अवसर सीएम योगी ने लिखी पाती, जल संरक्षण, प्रकृति और सामाजिक सहभागिता का किया आह्वान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेशवासियों से पवित्र सावन महीने को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सामाजिक भागीदारी के संकल्प के साथ मनाने का आह्वान किया। उन्होंने सावन को जनकल्याण, सामाजिक सद्भाव और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता के नाम जारी पत्र में कहा कि सावन का महीना एकजुटता, मेहनत और आध्यात्मिक अनुशासन का संदेश देता है। भगवान शिव की आराधना लोगों को संयम, त्याग और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने कहा, "सावन जनकल्याण, श्रम के सम्मान और एकजुटता का पवित्र पर्व है। प्रकृति इस समय नए सृजन का संदेश देती है और किसानों की मेहनत हरियाली और समृद्धि के रूप में दिखाई देने लगती है। जब प्रकृति के इस बदलाव को भगवान शिव की आराधना से जोड़ा जाता है, तो यह हमें जीवन में संयम, सेवा और सद्भाव का मार्ग दिखाता है।"

समुद्र मंथन की पौराणिक कथा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान शिव द्वारा हलाहल विष का पान सृष्टि की रक्षा के लिए किए गए महान त्याग का प्रतीक है। वहीं, भगवान शिव को जल अर्पित करने की परंपरा कृतज्ञता, त्याग और जनकल्याण की भावना को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का प्रकृति से गहरा संबंध है। उनकी जटाओं से निकलती गंगा, मस्तक पर विराजमान चंद्रमा, गले में सर्प और उनके वाहन नंदी प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सावन का महीना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नई ऊर्जा लेकर आता है। मानसून की बारिश के बाद प्रदेश में हरियाली फैल जाती है। धान की रोपाई के बाद किसानों द्वारा आयोजित सामूहिक भोज और सावन में शिव मंदिरों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक भागीदारी की भावना को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पंचतत्वों में जल जीवन का आधार है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण के लिए करीब 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए गए हैं। उन्होंने लखनऊ की एक आवासीय सोसायटी का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां RO सिस्टम और एयर कंडीशनर से रोजाना निकलने वाले करीब 50 हजार लीटर पानी को वर्षा जल संचयन प्रणाली से जोड़कर भूजल रिचार्ज किया जा रहा है। उन्होंने इसे जनभागीदारी का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पानी के अत्यधिक दोहन के कारण दुनियाभर में जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी बेहद जरूरी हो गई है। हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि प्रकृति से जितना लेते हैं, उतना ही उसे वापस लौटाने का प्रयास भी करें। उन्होंने प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि सावन को "सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक भागीदारी का महीना" बनाया जाना चाहिए।

योगी आदित्यनाथ ने कहा, "हर बूंद का सम्मान करें और हर पौधे की रक्षा करें। यही सावन का सच्चा संदेश है और यही समृद्ध, सुरक्षित और विकसित उत्तर प्रदेश की नींव भी है।" सावन हिंदू पंचांग का पांचवां महीना है और इसे भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इस दौरान सोमवार को व्रत रखने और भगवान शिव का जलाभिषेक करने की विशेष परंपरा है। सावन में कांवड़ यात्रा भी निकाली जाती है, जिसमें श्रद्धालु पवित्र नदियों से गंगाजल लाकर शिव मंदिरों में भगवान शिव को अर्पित करते हैं। यह महीना आध्यात्मिक शुद्धि, आत्मचिंतन और भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है।