मेरठ महोत्सव में आज प्रसिद्ध सिंगर म्यू़ज़िक कंपोज़र शंकरमहादेव पहुंचे हैं। ख़ास बातचीत में शंकर महादेवन ने कहा कि मेरठ में आज कंसर्ट है बहुत शुक्रगुज़ार हूं, मेरठ का ऋणी हूं। मेरठ से गहरा नाता है क्योंकि यहीं के बने हुए तानपुरे से पहली बार रियाज़ किया था। शंकर ने कहा कि नए वर्ष में वो महाकुंभ जाएंगे। जहां सोलह जनवरी को वो परफॉर्म करेंगे...शंकर ने चलो कुंभ चले गीत भी गुनगुनाया।
मीडिया से बातचीत में शंकर महादेवन ने कहा कि हम मुसाफिर हैं हर जगह परफॉर्म करते हैं। तीस साल से म्यूज़िक कंपोज़ कर रहा हूं। ब्रीथलेस सॉंग ने पहचान दिलाई थी, उन्होंने कहा कि गाना लैंडमार्क है मुझे आईडेंटिटी दिलाई है। शंकर ने कहा कि म्यूज़िक आत्मा से कनेक्ट करता है। हमें परिवर्तन के साथ चलना चाहिए। महादेवन ने कहा कि दस भाषाओं में गाने गाए हैं, हिंदी से ज्यादा साउथ के गाने गाए हैं। कंपोज़र एंड सिंगर के रुप में मुझे देखा जाता है।
पद्मश्री शंकर महादेवन ने कहा कि रिमिक्स करने का एक ढंग होता है। अगर अच्छे ढंग से रिमिक्स किया जाए तो उसकी बात अलग हो जाती है। लेकिन ढंग अच्छा होना चाहिए। उन्होंने बताया कि पंद्रह साल से विश्व की सबसे बडी़ म्यूज़िक एकेडमी चलाते हैं। नब्बे कंट्रीज़ में म्यू़ज़िक एकेडमी है, कहा कि मराठी फिल्म का म्यू़जिक लॉंच हुआ है। आमिर ख़ान के साथ सितारे ज़मीं पर फिल्म आने वाली है।
जिसके बाद शंकर ने कहा कि वो यंगस्टर्स को इनवेस्ट इन नॉलेज का मंत्र देना चाहते हैं। संयम के साथ कार्य करिए एक दिन उपरवाले का स्विच ऑन हो जाता है। जो भी कार्य करिए डूब कर करिए। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में रातोंरात स्टार बन जाते हैं लेकिन ओवरनाइट स्टार का मतलब ये नहीं कि आपका संगीत बहुत अच्छा है। ओवरनाइट स्टार बनिए लेकिन कांस्टेंट अप्रोच ही आपको आगे ले जाता है। तीस-चालीस साल आपके कार्य से ही पहचान बनती है। ज्ञान में इनवेस्ट कीजिए, हर व्यक्ति से सीखिए। हर संगीत के फॉर्म को सीखिए, अपनी ओरिजनलिटी मत खोइए, ओरिजनलिटी ही आपकी पहचान है।