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मेरठ: वायनाड रेस्क्यू ऑपरेशन में हेल्प कर रहे सेना के 3 फौजी डॉग्स, मलबे में तलाश रहे ज़िंदगी

वायनाड में भूस्खलन के बीच लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। इस रेस्कयू ऑपरेशन में सेना के फौजी श्वान भी जुटे हुए हैं। मिलिट्री डॉग्स वहां मलबे में ज़िंदगी की तलाश कर रहे हैं। इस विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मेरठ RVC से ट्रेंड किए गए डॉग्स भेजे गए हैं। जो लगातार वहां मलबे में लाशों और ज़िंदगियों को खोजने में अहम रोल निभा रहे हैं। 

वही इस ऑपरेशन में भारतीय सेना के 3 लेब्राडोर कुत्ते जाकी, डिक्सी और सारा शामिल हैं। ये तीनों ही सूंघने की बेजोड़ शक्ति से लबरेज़ हैं। साथ ही इन्हें विशेष तौर पर RVC ने क्रिटिकल ऑपरेशंस के लिए ट्रेंड किया है। जो लगातार मलबे में लाशों और जिंदगियों को सूंघकर तलाश रहे हैं। जो कीचड़, गाद और मिट्‌टी के बीच बारिश की परवाह किए बिना लगातार अपना काम कर रहे हैं। 

जहां मलबे में तब्दील हुए आबादी क्षेत्र में अब जिंदा बचे लोगों या फिर शवों की खोजबीन लगातार जारी है। यहां सेना का डॉग स्क्वॉड सुबह 7:00 बजे  से तलाशी अभियान चला रहा है। सेना ने एक बयान में कहा कि ह्यूमन्स बेस्ट फ्रेंड वायनाड में मलबे के नीचे फंसे इंसानों को खोजने के लिए इंसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करता है। भारतीय सेना के तीन लैब्राडोर कुत्ते जाकी, डिक्सी और सारा कीचड़ या बारिश की परवाह किए या बिना थके जीवन की तलाश में लगे हुए हैं। भारतीय सेना के तीनों खोजी और बचाव कुत्ते अपने मिशन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से प्रेरित हैं और अपनी सूंघने की बेजोड़ शक्ति से मलबे और गाद की गहराई में देख रहे हैं।

आपको बता दे कुत्तों को उत्तर प्रदेश के मेरठ में आरवीसी सेंटर और कॉलेज के डॉग ट्रेनिंग फैकल्टी (डीटीएफ) से लाया गया है। मेरठ आरवीसी में लगातार डॉग्स को ट्रेनिंग दी जाती है। यहां डॉग्स को रेस्कयू और इंवेस्टिगेशन सहित 9 तकनीकों में ट्रेंड किया जाता है। जाकी, सारा और डिक्सी तीनों खोज एवं बचाव (एसएआर) में ट्रेंड कुत्ते हैं, जिन्हें मलबे के नीचे मानव गंध की पहचान करने और संकेत देने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।ये कुत्ते मलबे के 10-12 फीट नीचे भी मानव शरीर की गंध को पहचान सकते हैं। जब उन्हें मलबे के नीचे मानव गंध मिलती है, तो वे अपने संचालकों को मनुष्यों की उपस्थिति का संकेत देते हैं, जो फिर खुदाई करके जीवित या मृत शरीर निकालते हैं। इन कुत्तों को पहले भी बड़ी सफलता के साथ तैनात किया गया है। तीनों डॉग्स को 12 सप्ताह का स्पेशल बुनियादी प्रशिक्षण और 24 हफ्ते का स्पेशल प्रशिक्षण दिया गया है।