पश्चिम बंगाल में पश्चिम मेदिनीपुर जिले के कुम्हार पारंपरिक गुड़िया बनाने में जुटे हैं। इन गुड़ियाओं का प्रयोग ज्यादातर दिवाली के वक्त और काली पूजा में किया जाता है। 100 से ज्यादा कुम्हार परिवार ना केवल गुड़िया बल्कि टेराकोटा प्रोडक्ट भी बना रहे हैं।
हालांकि, कुम्हारों का ये भी कहना है कि पिछली बार हुई बेमौसम बारिश की वजह से उनके प्रोडक्ट खराब हो गए थे और बिक्री पर भी काफी असर पड़ा था। इसलिए वे इस बार काफी सावधानी बरत रहे हैं।
पिछली साल की तुलना में इस साल कुम्हारों को उम्मीद है कि अच्छी बिक्री होगी और रोशनी का त्योहार उनके लिए खुशियां लेकर आएगा।