ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गनाइजेशन (AMUCO) और कई नागरिक समाज संगठनों ने गुरुवार को इंफाल में विरोध रैली निकाली। यह प्रदर्शन ट्रोंग्लाओबी बम हमले के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग को लेकर किया गया, जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई थी और उनकी मां घायल हो गई थीं। रैली जब केइशमथोंग होदम लेइरक पहुंची तो केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया। हालांकि, अधिकारियों ने एक छोटे प्रतिनिधिमंडल को आगे बढ़ने और मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से मिलकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने की अनुमति दी।
यह विरोध प्रदर्शन 7 अप्रैल को मोइरांग के ट्रोंग्लाओबी अवांग लेइकाई में हुई घटना के बाद शुरू हुआ, जहां संदिग्ध उग्रवादियों ने रात करीब 1 बजे एक घर पर बम फेंका था। इस हमले में एक पांच साल के लड़के और उसकी पांच महीने की बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी मां घायल हो गईं मुख्यमंत्री ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे “मानवता पर हमला” बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने अस्पताल जाकर घायल महिला से मुलाकात की और अधिकारियों को सर्वोत्तम इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “यह बर्बर कृत्य मानवता पर हमला है और मणिपुर में स्थापित शांति को भंग करने की साजिश है। मैं इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। दोषियों की पहचान कर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे आतंकवादी कृत्य बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।” घटना के बाद बढ़ते तनाव को देखते हुए राज्य सरकार ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। सुरक्षा बलों ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है, जिसमें मणिपुर पुलिस, असम राइफल्स और सीआरपीएफ के जवानों के साथ हवाई निगरानी भी की जा रही है।
इस घटना से लोगों में भारी आक्रोश है। प्रदर्शनकारियों ने इंफाल-तिदिम मार्ग समेत कई प्रमुख सड़कों को जाम कर दिया और कुछ जगहों पर वाहनों में आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने इंफाल वेस्ट, इंफाल ईस्ट, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में अस्थायी रूप से इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं।