शहर में पड़ रही तेज गर्मी को देखते हुए नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क प्रशासन ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। जंगली जानवरों, खासकर बाघ, शेर, तेंदुए और भालुओं को सुबह बाहर छोड़ने से पहले नहलाया जा रहा है। उनके नाइट शेल्टर में बड़े कूलर लगाए गए हैं, वहीं प्रदर्शनी क्षेत्रों में पानी के स्प्रिंकलर और रेन गन की व्यवस्था की गई है। सीनियर वाइल्डलाइफ वेटरनरी डॉक्टर अरविंद माथुर ने बताया कि जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। उन्हें ठंडा रखने के लिए पानी के कुंड भी बनाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि जानवरों के खानपान में भी बदलाव किया गया है। भालुओं को ठंडा दूध और फ्रूट आइसक्रीम दी जा रही है, शाकाहारी जानवरों को खीरा, करेला और तरबूज खिलाया जा रहा है, जबकि हिप्पोपोटेमस को भी तरबूज दिया जा रहा है। बाघ और तेंदुए के शावकों को उनके नियमित आहार के साथ चिकन भी दिया जा रहा है।
धूप से बचाव के लिए नाइट शेल्टर पर ग्रीन नेट लगाए गए हैं। सभी जानवरों को डीवॉर्मिंग के साथ विटामिन, मिनरल, कैल्शियम सप्लीमेंट और एंटी-स्ट्रेस दवाएं दी जा रही हैं, वहीं उनके पानी में ग्लूकोज मिलाया जा रहा है। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क अपने सफल प्रजनन कार्यक्रमों के लिए भी जाना जाता है। हाल ही में यहां भालू ने शावकों को जन्म दिया है, जबकि इससे पहले टाइग्रेस ‘रानी’ ने तीन शावकों को जन्म दिया था। यह पार्क भेड़ियों के सफल प्रजनन के मामले में भी देश में अग्रणी बनता जा रहा है।