नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार से भारत की तीन दिवसीय यात्रा शुरू करेंगे और इस दौरान ऊर्जा, व्यापार एवं निवेश, रक्षा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ पश्चिम एशिया संकट पर विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा।
इस साल रुबियो की यह दूसरी भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के संबंधों में लगातार तनाव बना हुआ है। इससे पहले मई में अपनी यात्रा के दौरान अमेरिकी विदश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी। इसके अलावा, उन्होंने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया था।
अमेरिका के विदेश मंत्री के साथ कारोबारियों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के भी आने की उम्मीद है।
मंगलवार दोपहर मुंबई में जयशंकर और रुबियो के बीच होने वाली बैठक में भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा होने की संभावना है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, रुबियो दोपहर दो बजकर 15 मिनट पर छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेंगे।
जयशंकर के साथ बैठक के अलावा, मुंबई में रुबियो के कार्यक्रमों में 26/11 के आतंकवादी हमले के मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए ताज स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करना भी शामिल है। उस हमले में छह अमेरिकी नागरिकों सहित 160 से अधिक लोगों की जान गई थी।
अमेरिका के शीर्ष राजनयिक अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक स्वागत समारोह में भी शामिल होंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले सप्ताह कहा था, “बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा होने की उम्मीद है, जिनमें ऊर्जा, व्यापार एवं निवेश, रक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियां तथा आपसी हित के अन्य विषय शामिल हैं।’’
दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते और पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा होने की संभावना है।
रुबियो बुधवार को गुजरात के जामनगर जाएंगे।
भारत यात्रा से पहले रुबियो ने उज्बेकिस्तान में कहा कि अमेरिका, भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के ‘‘बहुत करीब’’ है।
उन्होंने यह संकेत भी दिया कि रूसी तेल खरीदने के मामले में भारत को अमेरिकी शुल्क से मिली छूट का संबंध इस समझौते को अंतिम रूप देने के फैसले से है।
रुबियो ने कहा, ‘‘हम अभी भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम इसे पूरा करने के बहुत करीब हैं। इसलिए जब राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर शुल्क से छूट और इस तरह के अन्य मामलों पर फैसला लेते हैं, तो यह उन बातों में से एक है, जिन पर हम विचार करते हैं।’’
भारत और अमेरिका 2025 की शुरुआत से प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसका उद्देश्य शुल्क संबंधी मतभेदों को दूर करना, गैर-शुल्क बाधाओं को खत्म करना और दोनों देशों के बाजारों तक पहुंच बढ़ाना है।
भारत अपने उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अधिक अनुकूल शुल्क व्यवस्था चाहता है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कुछ दिन पहले कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता अब समझौते के ‘‘अंतिम चरण’’ के करीब पहुंच रही है।
भाषा गोला रंजन
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