प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित ‘पंप एंड डंप’ शेयर बाजार घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 200 करोड़ रुपये फ्रीज किए हैं। एजेंसी ने महाराष्ट्र और गुजरात में 29 ठिकानों पर छापेमारी के दौरान ट्रेडिंग खातों में मौजूद इस रकम को फ्रीज किया। मामला कुछ सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की कीमतों में कथित हेरफेर से जुड़ा है।
ED ने 16 अक्टूबर को महाराष्ट्र के मुंबई और नासिक के अलावा गुजरात के अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान एजेंसी ने आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, शेयर लेनदेन के रिकॉर्ड और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए।
कम कीमत पर शेयर लेकर कीमतें बढ़ाने का आरोप
ED के मुताबिक, जांच में सामने आया कि अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच दो कंपनियों ने चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और कन्वर्टिबल वारंट जारी किए। एजेंसी का आरोप है कि इन शेयरों के आवंटन के लिए भुगतान की गई रकम का बड़ा हिस्सा आपस में जुड़े कुछ लोगों, कंपनियों और कर्ज देने वालों से आया था।
इसके बाद के महीनों में इन कंपनियों के शेयरों की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ाई गईं, जबकि ज्यादातर शेयर उन्हीं लोगों के पास बने रहे। ED को संदेह है कि इस तरीके से शेयरों की कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाने की योजना बनाई गई थी।
ऑनलाइन ग्रुप्स में शेयर खरीदने के टिप्स दिए गए
जांच एजेंसी के अनुसार, दिसंबर 2025 के अंत से फरवरी 2026 के बीच ‘Multibagger Stocks’ जैसे नामों वाले ऑनलाइन ग्रुप्स के जरिए खुदरा निवेशकों को रोजाना इन शेयरों को खरीदने के सुझाव दिए गए।
ED का दावा है कि इन ग्रुप्स को चलाने के लिए हरियाणा और मुंबई में दूसरे लोगों के नाम पर लिए गए सिम कार्ड इस्तेमाल किए गए, जबकि इन्हें गुजरात के भावनगर से संचालित किया जा रहा था। इन संदेशों के कारण शेयरों में खरीदारी करने वाले निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी, जिससे कीमतों में और उछाल आया। एजेंसी के मुताबिक, ऑनलाइन ग्रुप्स में लगातार प्रचार के दौरान संबंधित कंपनी के शेयरों की कीमत और कारोबार की मात्रा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
बढ़ी कीमतों का फायदा उठाकर शेयर बेचने का आरोप
ED ने आरोप लगाया कि कम कीमत पर शेयर और वारंट पाने वाले लोगों ने ऑनलाइन प्रचार के जरिए निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी का फायदा उठाया। इसके बाद उन्होंने अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बड़ी संख्या में निवेशकों को बेच दिया। जांच के दौरान एजेंसी ने इस कथित योजना से लाभ पाने वाले ऐसे लोगों के समूहों की पहचान भी की है, जिनके बीच पारिवारिक संबंध बताए जा रहे हैं।
ED के अनुसार, इन लोगों ने पहले कम कीमत पर शेयर हासिल किए और फिर विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों से शेयरों की कीमतें बढ़ाने के लिए अभियान चलाया गया। फिलहाल ED मामले की जांच कर रही है। छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।