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लखनऊ के दुर्गा पूजा पंडालों में दिख रही ‘मिनी बंगाल’ की झलक

लखनऊ, 19 अक्टूबर (भाषा) अयोध्या के राम मंदिर से लेकर फिल्म अभिनेता उत्तम कुमार, कोलकाता की मशहूर दुर्गा पूजा, ग्रामीण बंगाल और ‘डाकेर साज’ तक, विभिन्न विषयों पर आधारित पूजा पंडालों ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को मानो ‘मिनी बंगाल’ में तब्दील कर दिया है।

लखनऊ का 100 साल से अधिक पुराना बंगाली क्लब और यंग मेन्स एसोसिएशन दिग्गज अभिनेता उत्तम कुमार के शानदार सफर को दर्शा रहा है, जबकि जोगेंद्र पाठक रोड पूजा समिति के पंडाल में महाषष्ठी (नवरात्र का छठा दिन) से विजयादशमी (दसवां दिन) तक कोलकाता की मशहूर दुर्गा पूजा की झलक देखने को मिल रही है।

रवींद्रपल्ली दुर्गा पूजा समिति की इस साल की थीम ‘चिरंतन बांग्ला’ (शाश्वत बंगाल) है, जबकि ट्रांस-गोमती दुर्गा पूजा समिति के पंडाल का मुख्य आकर्षण ‘डाकेर साज’ है। यह देवी दुर्गा और उनके परिवार की प्रतिमाओं को सजाने की पारंपरिक शैली है, जिसमें चांदी जैसी सफेद सजावट का इस्तेमाल किया जाता है।

बंगाली क्लब और यंग मेन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण बनर्जी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “वर्ष 2026 में महान अभिनेता उत्तम कुमार की जन्मशती मनाई जा रही है। उनका जन्म अरुण कुमार चट्टोपाध्याय के नाम से हुआ था। बंगाल में ‘महानायक’ के 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है और यहां लखनऊ में बंगाली क्लब उनके शानदार सफर का जश्न मना रहा है।”

बनर्जी ने बताया कि बंगाली क्लब के पूरे पंडाल को अभिनेता के पोस्टर से सजाया गया है। यहां उत्तम कुमार और उनकी समकालीन अभिनेत्रियों, जैसे सुचित्रा सेन पर फिल्माए गए सुपरहिट गाने भी बजाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस साल बंगाली क्लब में पुरुषों के लिए धोती और महिलाओं के लिए साड़ी पहनकर पारंपरिक बंगाली वेशभूषा प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है। इसमें शीर्ष तीन प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार दिए जाएंगे।

जोगेंद्र पाठक रोड पूजा समिति के पदाधिकारी सिद्धार्थ सान्याल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उनका पंडाल कोलकाता की दुर्गा पूजा को समर्पित है।

उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में जमींदारों की हवेलियों को ‘बोनेदी बाड़ी’ कहा जाता है। इन हवेलियों के बीच में खुले आंगन होते हैं, जिन्हें ‘ठाकुर दलान’ कहा जाता है। यहां देवी दुर्गा के साथ अन्य देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। हमारे पंडाल में भी इसी अवधारणा को दर्शाया गया है। इसके लिए चित्रों वाली विनाइल शीट का इस्तेमाल किया गया है, जिन पर हावड़ा ब्रिज, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, हिल्सा मछली और कोलकाता के अन्य प्रमुख स्थलों को दिखाया गया है।”

सान्याल ने यह भी बताया कि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए गठित यूनेस्को की 16वीं अंतरसरकारी समिति ने 15 दिसंबर 2021 को पेरिस में हुई बैठक में कोलकाता की दुर्गा पूजा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था।

रवींद्रपल्ली दुर्गा पूजा समिति के पूर्व अध्यक्ष मिहिर बनर्जी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “इस साल हमारी थीम ‘चिरंतन बांग्ला’ है। कोलकाता के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार हमारा अनूठा पंडाल आगंतुकों को ग्रामीण बंगाल की झलक दिखाता है।”

ट्रांस-गोमती दुर्गा पूजा समिति के महासचिव जॉयंतो सरकार ने कहा, “हमारे पूजा पंडाल का मुख्य आकर्षण ‘डाकेर साज’ है। यह मां दुर्गा के प्रति प्रेम की हमारी विनम्र भेंट है।”

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सजावट नहीं है, बल्कि इसकी चमक-दमक साझा यादों, गहरी जड़ें जमाए परंपराओं और उन भावनात्मक रिश्तों को दर्शाती है, जो मां दुर्गा की भक्ति के जरिए समुदाय को एकजुट करते हैं।

युवा पीढ़ी, खासकर जेन-जी का ध्यान आकर्षित करने के लिए कैंटोनमेंट पूजा और सेवा समिति ने लखनऊ के उस्मान रोड इलाके में स्थित अपने पूजा पंडाल परिसर में सेल्फी पॉइंट भी बनाए हैं।

समिति के मीडिया सचिव निहार रंजन डे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “जेन-जी इंटरनेट और सोशल मीडिया पर छाई हुई है। हमारा मानना है कि इस पीढ़ी को भी देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा अपनानी चाहिए। पंडाल में बनाए गए अलग-अलग सेल्फी पॉइंट का मकसद उन्हें यहां आकर्षित करना है, ताकि वे मां दुर्गा का आशीर्वाद ले सकें।”

मित्रो संघो (मॉडल हाउस पार्क) पूजा समिति के मुख्य संरक्षक वीके तिवारी ने बताया कि उनका पूजा पंडाल गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर जैसा दिखता है।

वहीं, जानकीपुरम के पॉकेट-ई में आयोजित दुर्गा पूजा का पंडाल अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। इसमें राम पथ और लता मंगेशकर चौक की झलक भी दिखाई गई है, जो अयोध्या के नए आकर्षणों में शामिल हैं।

पुराने शहर की रहने वाली गृहिणी ममता शाह ने कहा, “मैंने अभी तक राम मंदिर नहीं देखा है, लेकिन इस पूजा पंडाल को देखने के बाद अब हम जल्द ही अयोध्या जाने की योजना बना रहे हैं।”

भाषा

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