मुंबई, 19 अक्टूबर (भाषा) सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) ने सोमवार को अपने न्यासी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की शिकायतों पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय में अपना जवाब दाखिल कर दिया।
उद्योगपति श्रीनिवासन और पूर्व रक्षा सचिव सिंह ने न्यासियों (ट्रस्टी) की नियुक्ति में अनियमितताओं और मनोनीत निदेशकों को स्वतंत्र निर्णय लेने से रोकने का आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई थीं।
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने सोमवार देर शाम जवाब दाखिल किए जाने की पुष्टि की। हालांकि, जवाब में क्या कहा गया, इसके बारे में तुरंत पता नहीं चल सका।
टाटा समूह के भीतर चल रहे लंबे विवाद के बीच श्रीनिवासन और सिंह की अलग-अलग शिकायतों में एसडीटीटी के चेयरमैन नोएल टाटा और उनके पुत्र तथा वाइस चेयरमैन नेविल का नाम शामिल किया गया है।
एसडीटीटी के पास टाटा संस में लगभग 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह की होल्डिंग कंपनी में शेयरधारकों के बीच इसे सबसे बड़ा मालिक बनाती है।
चैरिटी कमिश्नर ने शुरुआत में एसडीटीटी को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए 12 अक्टूबर तक का समय दिया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 19 अक्टूबर कर दिया गया था।
खबरों के मुताबिक, शिकायतों में इस बात का जिक्र है कि नोएल टाटा को एसडीटीटी में आजीवन ट्रस्टी क्यों बनाया गया है, और साथ ही ट्रस्ट में कामकाज के तरीकों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं तथा आरोप लगाया गया है कि यह टाटा संस के व्यावसायिक निर्णयों में हस्तक्षेप करता है।
उल्लेखनीय है कि चैरिटी कमिश्नर के पास जाने के बाद, श्रीनिवासन और सिंह ने एसडीटीटी के अन्य न्यासियों तथा टाटा ट्रस्ट के हिस्से वाले सह-संस्थान सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) की कमान संभाल रहे लोगों को भी पत्र लिखे थे।
भाषा पाण्डेय अजय
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