पटियाला (पंजाब), 19 अक्टूबर (भाषा) पंजाब में सत्तारूढ़ दल आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक गुरदेव सिंह देव मान द्वारा एक युवक की पिटाई करने का वीडियो सोमवार को सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया ।
संबंधित विधायक का दावा है कि युवक लापरवाही से गाड़ी चला रहा था और उसकी मोटरसाइकिल उनके वाहन से टकराने ही वाली थी।
विपक्ष के नेताओं ने नाभा के विधायक मान पर मनमानी करने का आरोप लगाया और उनके ‘शर्मनाक व्यवहार’ को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कथित वीडियो में, विधायक उस युवक को लात मारते और थप्पड़ जड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। मान के साथ मौजूद एक पुलिसकर्मी भी उसे थप्पड़ मारता और अपने साथ ले जाता हुआ नजर आ रहा है।
बाद में मान ने फेसबुक पर अपने पोस्ट में दावा किया कि वह युवक बिना नंबर वाली अपनी मोटरसाइकिल बहुत लापरवाही से चला रहा था और वह लगभग उनकी गाड़ी से टकरा ही गया था।
मान के अनुसार, उस युवक के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था; वह उन्हें देखकर वहां से तेजी से भाग निकला, लेकिन जल्द ही पकड़ा गया।
विधायक ने सवाल किया, ‘‘वह भागा क्यों?’’
उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच करेगी।
मान ने कहा कि पुलिस द्वारा रुकने का इशारा किए जाने के बावजूद “बिना पंजीकरण क्रमांक वाली मोटरसाइकिल के साथ भाग रहे” व्यक्ति को पकड़ने में मदद करना उनकी जिम्मेदारी थी।
विपक्षी नेताओं ने हालांकि विधायक की इस दलील को नहीं माना और उनकी ‘वीआईपी मानसिकता’ के लिए सख्त कार्रवाई की मांग की।
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘वीडियो देखिए कि वह उसे किस तरह लात मार रहे हैं। ऐसा लगता है कि उन्हें कानून का कोई डर ही नहीं रहा। वह किसी नकली दक्षिण भारतीय फिल्म के नायक की तरह घूम रहे हैं और लोगों के साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं मानो वे कीड़े-मकोड़े हों।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘शर्मनाक और घिनौना व्यवहार। मैं 'वीआईपी मानसिकता’ से ग्रस्त इन विधायक के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग करता हूं।’’
कांग्रेस नेता विजय इंदर सिंगला ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘ क्या 'आप' की पंजाब क्रांति इस मुकाम पर आ गई है? एक मामूली दुर्घटना के विवाद को लेकर विधायक देव मान अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ मिलकर एक व्यक्ति को बेरहमी से लात मारते हुए दिखाई दे रहे हैं।’’
उन्होंने पोस्ट में पूछा, ‘‘....जब 'रक्षक' होने का वादा करने वाले ही 'भक्षक' बन जाएं, तो लोगों की सेवा करने के उनके दावे का क्या अर्थ रह जाता है?’’
भाषा राजकुमार प्रशांत
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