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हरियाणा सरकार निजी कंपनी को बिजली वितरण लाइसेंस देने के आदेश के खिलाफ अपील करेगी: विज

चंडीगढ़, 19 अक्टूबर (भाषा) हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार गुरुग्राम और नूंह जिले में एक निजी कंपनी को बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देने के आदेश के खिलाफ अपील करेगी।

विज ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, “हरियाणा विद्युत नियामक आयोग द्वारा इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देने के आदेश के खिलाफ सरकार विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) में अपील करेगी।”

इलेवन पावर ने बयान में कहा कि हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) ने 19 अक्टूबर के आदेश में बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 14 के तहत कंपनी को दोनों जिलों में 25 साल के लिए बिजली वितरण का लाइसेंस दिया है।

कंपनी अगले पांच वर्षों में बिजली वितरण नेटवर्क पर 4,717 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2027-28 में बिजली आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है।

इस लाइसेंस के तहत इलेवन पावर मौजूदा बिजली वितरण कंपनी की जगह लेने के बजाय उसके साथ ही काम कर सकेगी। उपभोक्ताओं को तत्काल कोई कदम उठाने की जरूरत नहीं होगी और मौजूदा कंपनी अपने ग्राहकों को बिजली की आपूर्ति जारी रखेगी। इलेवन पावर का नेटवर्क संबंधित क्षेत्रों तक पहुंचने के बाद उपभोक्ताओं को कंपनी बदलने का विकल्प मिल सकेगा।

विज ने अगस्त में कहा था कि राज्य सरकार गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली कंपनियों को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव के खिलाफ है।

उन्होंने उस समय कहा था कि समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन ऊर्जा विभाग के बजाय सीधे एक स्वायत्त निकाय हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के समक्ष दिया गया था।

विज के अनुसार, जब आयोग ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा, तो उन्होंने प्रस्ताव के हर बिंदु पर विरोध जताया।

फिलहाल, सरकारी स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) इन दोनों जिलों में उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति करती है।

इस बीच, विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) के संरक्षक और पूर्व मंत्री संपत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का फैसला कोई सामान्य नियामकीय आदेश नहीं है।

सिंह ने बयान में कहा, “यह हरियाणा के सार्वजनिक बिजली क्षेत्र, किसानों, ग्रामीण उपभोक्ताओं और गरीबों के हितों तथा इस सिद्धांत पर गंभीर और ऐसा आघात है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती कि आवश्यक सेवाएं मुनाफे से पहले लोगों के हितों को प्राथमिकता दें।”

उन्होंने कहा, “हरियाणा में पहली बार एक ही क्षेत्र में दो बिजली वितरण एजेंसियों को काम करने की अनुमति दी गई है। अबतक किसी क्षेत्र में बिजली वितरण या तो राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या किसी निजी लाइसेंसधारक के जिम्मे रहा है, न कि एक ही आपूर्ति क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने वाली दो समानांतर एजेंसियों के जिम्मे।”

सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के रुख से स्पष्ट है कि यह फैसला केवल स्वतंत्र नियामक का नहीं है।

उन्होंने कहा कि गुरुग्राम का दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के राजस्व में अपेक्षाकृत बड़ा योगदान है और वहां बिजली वितरण में नुकसान भी सबसे कम वाले क्षेत्रों में से एक है।

भाषा योगेश अजय

अजय