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400 रन बनाना सपने जैसा लगा, सबसे पहले पिता को फोन किया: चिन्मय सुतार

बेंगलुरु, 19 अक्टूबर (भाषा) रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप मुकाबले में रविवार को नगालैंड के खिलाफ मिजोरम की ओर से नाबाद 400 रन की ऐतिहासिक पारी खेलने के बाद चिन्मय सुतार अपने पिता राजेश से बात करते समय भावुक हो गए थे।

यह भावुकता सिर्फ इसलिए नहीं थी कि वह बीबी निंबालकर (नाबाद 443 रन) के बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट में चौहरा शतक लगाने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज बन गए थे बल्कि इसलिए भी थी कि उनके करियर में कई मौकों पर वह इस उपलब्धि के करीब पहुंचकर चूक गए थे और उन्हें निराशाओं का सामना करना पड़ा था।

नगालैंड के सोविमा से पीटीआई से बात करते हुए सुतार ने कहा, ‘‘हां, 400 रन बनाना बहुत शानदार एहसास था। मुझे लगा कि यह किसी सपने जैसा है।’’

मुंबई के लिए सात प्रथम श्रेणी मैच खेल चुके राजेश वह पहले व्यक्ति थे जिनके साथ सुतार ने इस यादगार उपलब्धि की खुशी साझा की।

उन्होंने कहा, ‘‘हां, दिन का खेल समाप्त होने के बाद मैंने सबसे पहले अपने पिता को फोन किया। यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी और मैं सबसे पहले यह खुशी अपने पिता के साथ साझा करना चाहता था। शुरुआती दिनों से ही उन्होंने मेरा बहुत साथ दिया है।’’

सुतार ने कहा, ‘‘जब भी मुझे खेलने का मौका नहीं मिल पाता था तो वह हमेशा मेरे साथ खड़े रहते थे। वह मुझे मजबूत बने रहने और अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने की सलाह देते थे। अब जब मेरे करियर में इतना बड़ा पल आया तो मुझे लगा कि सबसे पहले मुझे उन्हीं से बात करनी चाहिए।’’

हालांकि सुतार के लिए यह ऐतिहासिक उपलब्धि जुझारू लालरेम्पुइया छकछुआक के योगदान के बिना संभव नहीं हो पाती।

छकछुआक ने 76 गेंद का सामना करते हुए नाबाद 14 रन बनाए और दसवें विकेट के लिए सुतार के साथ 189 रन की अटूट साझेदारी की।

भाषा सुधीर

सुधीर