अहमदाबाद, 19 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस ने सोमवार को गुजरात की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने 20 जून से ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत श्रमिकों के भुगतान को रोक रखा है।
वहीं, प्रदेश भाजपा के एक प्रवक्ता ने कहा कि निधि की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बकाया राशि के भुगतान में किसी तकनीकी या प्रशासनिक समस्या की ओर इशारा किया।
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने दावा किया कि सरकार ने इन श्रमिकों को मनरेगा (अब विकसित भारत - जी राम जी अधिनियम) के तहत पारिश्रमिक देने से इनकार कर ग्रामीण श्रमिकों की अनदेखी की है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना को तत्कालीन संप्रग सरकार ने इसलिए शुरू किया था ताकि ग्रामीण श्रमिक बिना रोजगार के न रहें।
उन्होंने प्रेसवार्ता में दावा किया, ‘‘गुजरात सरकार उन श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान करने में विफल रही है, जो 20 जून से कठिन शारीरिक श्रम में लगे हुए हैं। इस अधिनियम के तहत किसी मजदूर द्वारा किए गए काम का भुगतान 15 दिनों के भीतर सीधे उसके बैंक खाते में किया जाना चाहिए।’’
भावनगर जिले का उदाहरण देते हुए उन्होंने दावा किया कि मजदूरों की 2.66 करोड़ रुपये की मजदूरी कई महीनों से बकाया है।
उन्होंने 17 सितंबर 2026 को भावनगर की जिला ग्रामीण विकास एजेंसी के निदेशक द्वारा ग्रामीण विकास आयुक्त को लिखी गयी चिट्ठी की प्रति भी पेश की।
गोहिल ने आरोप लगाया, ‘‘पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि मनरेगा योजना के कानूनी प्रावधानों के तहत, काम पूरा होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरों को भुगतान कर दिया जाना चाहिए; लेकिन भावनगर जिले में, ये भुगतान अब भी बकाया हैं।’’
गोहिल ने कहा, ‘‘इस योजना में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें भाजपा के नेता और एक पूर्व मंत्री शामिल हैं। यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है कि भ्रष्ट लोग मनरेगा योजना से मुनाफा कमाएं, जबकि मजदूरों को उनकी कड़ी मेहनत का भुगतान न मिले।’’
प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता अनिल पटेल ने कहा कि गोहिल सिर्फ एक जिले की बात कर रहे हैं और उनके दावे एक अधिकारी के पत्र पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह जांच करने की जरूरत है कि क्या कोई तकनीकी दिक्कत है, क्योंकि मनरेगा के तहत निधि की कोई कमी नहीं है। सरकार पहले ही निधि आवंटित कर चुकी है। लेकिन, मुझे यह पता लगाना होगा कि क्या तकनीकी, प्रशासनिक या पत्राचार से जुड़ी कोई समस्या है।’’
भाषा राजकुमार सुभाष
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