मुंबई, 19 अक्टूबर (भाषा) उत्तर मुंबई के मनोरी में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की ओर से प्रस्तावित समुद्री जल के खारे पानी को दूर करने वाले संयंत्र का मछुआरा समुदाय विरोध कर रहा है।
इस परियोजना के खिलाफ मछुआरों ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है। मछुआरा संगठनों ने आशंका जताई कि इस परियोजना से समुद्री जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है और पारंपरिक मछली पकड़ने पर निर्भर लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने परियोजना की लागत और शहर के जल प्रबंधन को लेकर भी चिंता जताई है।
सोमवार को मछुआरों का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न संगठनों ने बांद्रा स्थित मुंबई उपनगरीय जिलाधिकारी कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला।
कांग्रेस विधायक भाई जगताप के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई उपनगरीय जिलाधिकारी सौरभ कटियार को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
इस प्रतिनिधिमंडल में गोराई, मनोरी, मढ़, उत्तन, पाली, डोंगरी और चौक गांवों के मछुआरा संगठनों तथा सहकारी समितियों के प्रतिनिधि शामिल थे।
नवरात्र का त्योहार होने के बावजूद मछुआरा समुदाय की बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने विरोध मार्च में हिस्सा लिया।
मछुआरा समुदाय ने राजस्व विभाग की जमीन पर प्रस्तावित इस परियोजना का निर्माण उनकी आपत्तियों पर विचार करने और परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों की जांच होने तक जारी रखने की मांग की।
उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात का समय देने की भी मांग की। अक्टूबर में प्रस्तावित संयंत्र के खिलाफ यह दूसरा विरोध मार्च था। इससे पहले, इसी महीने मछुआरों ने स्थानीय तहसीलदार कार्यालय तक मार्च निकाला था।
महानगरपालिका ने महानगर में पेयजल की कमी दूर करने के लिए समुद्री जल को शुद्ध कर पीने योग्य बनाने वाला संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है।
इसके शुरुआती चरण में प्रतिदिन 200 मिलियन लीटर (20 करोड़ लीटर) पेयजल मिलेगा।
भाषा जितेंद्र रंजन
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