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बच्ची के साथ बलात्कार उसकी गरिमा को अंधकार में दफन करने देने जैसा वीभत्स कृत्य है:अदालत

मुंबई, 19 अक्टूबर (भाषा) महाराष्ट्र में नासिक की एक अदालत ने चार साल की लड़की की बलात्कार के बाद हत्या करने वाले व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार की नरमी बरते जाने से इंकार करने के साथ ही कहा कि इससे न्याय व्यवस्था में जनविश्वास कमजोर होगा।

अदालत ने कहा कि एक बच्ची से बलात्कार उसकी गरिमा को अंधकार में दफन कर देने जैसा वीभत्स कृत्य है।

एक त्वरित अदालत ने शुक्रवार को विजय संजय खैरनार को पिछले साल के अंत में चार साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने और उसकी हत्या करने के जुर्म में मौत की सजा सुनाई।

अदालत ने इस जघन्य अपराध को ‘दुर्लभतम’ करार दिया।

एक विस्तृत आदेश में, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के जी पालदेवार ने कहा कि जिस बेरहमी से पीड़िता के शव को फेंका गया, उसने समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर दिया है। न्यायाधीश पालदेवार ने यह भी कहा कि इतने जघन्य अपराध के मामले में किसी भी तरह की सहानुभूति दिखाना अनुचित होगा।

अदालत ने कहा कि दोषी द्वारा दिखाई गई घोर दुष्टता के कारण, आजीवन कारावास के वैकल्पिक दंड का विकल्प ‘पूरी तरह से समाप्त’ हो गया ।

अभियोजन के अनुसार नासिक जिले में मालेगांव तालुका के एक गांव में 16 नवंबर 2025 को यह बच्ची अपने घर के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी, तभी आरोपी खैरनार उसे चॉकलेट का लालच देकर अपने साथ ले गया।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक इसके बाद उसने उसके साथ बलात्कार किया, उसे पीट-पीटकर और एक करधनी (पतले धागे) से गला घोंटकर मार डाला एवं उसके शव को अपने घर के बगल में एक बंद मोबाइल टावर परिसर के अंदर फेंक दिया।

आरोपी वेल्डिंग और फर्नीचर का काम करता था।

खैरनार को भारतीय न्याय संहिता तथा बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा, ‘‘एक नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार करना, उसके सम्मान को अंधेरे में दफन कर देने जैसा एक वीभत्स कृत्य है। यह एक बच्ची के पवित्र शरीर और समाज की आत्मा के खिलाफ किया गया अपराध है।’’

भाषा

राजकुमार नरेश

नरेश