नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्टूबर से प्रभावी होने के साथ ही, वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को इस देश से सेब, कीवी और मानुका शहद के आयात के लिए रियायती शुल्क-आधारित कोटे के आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित कर दी है।
इस समझौते के तहत भारत सेब, कीवी, मानुका शहद और एल्ब्यूमिन के लिए न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) और अन्य रक्षोपाय के साथ नियमित तरीके से शुल्क दर कोटा (टीआरक्यू) दे रहा है।
इस लिहाज से घरेलू किसानों के हितों की रक्षा करते हुए आयात को नियंत्रित रखना सुनिश्चित किया गया है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक सार्वजनिक नोटिस में कहा, ‘‘भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तहत टीआरक्यू के आवंटन की प्रक्रिया को अधिसूचित किया जाता है।’’
भारत इस समझौते के तहत इन उत्पादों की तय मात्रा को रियायती आयात शुल्क दरों पर प्रवेश की अनुमति दे रहा है। नोटिस के अनुसार, ये प्रावधान 20 अक्टूबर, 2026 से लागू होंगे।
सेब के मामले में पहले साल कोई कोटा नहीं होगा। दूसरे साल में कोटा 35,000 टन होगा, जो तीसरे साल में इसे बढ़कर 37,500 टन, चौथे साल में 40,000 टन और पांचवें साल में 42,500 टन किया जाएगा।
छठे साल से यह मात्रा सालाना 45,000 टन होगी। इन आयात पर 25 प्रतिशत शुल्क लगेगा, बशर्ते उनका लागत, बीमा और माल ढुलाई (सीआईएफ) मूल्य कम से कम 1.25 डॉलर प्रति किलोग्राम हो। वार्षिक आयात खिड़की एक अप्रैल से 31 अगस्त तक होगी। इस समय भारत में सेब पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क है।
कीवी के लिए पहले साल कोई कोटा नहीं होगा। कोटा दूसरे साल में 8,000 टन से शुरू होगा और तीसरे साल में बढ़कर 9,750 टन, चौथे साल में 11,500 टन और पांचवें साल में 13,250 टन हो जाएगा। छठे साल से यह सालाना 15,000 टन होगा। इस कोटे के तहत आयात शुल्क-मुक्त होगा यदि उनका सीआईएफ मूल्य कम से कम 1.80 डॉलर प्रति किलोग्राम हो।
इसी तरह, प्रोटीन उत्पादों की श्रेणी 'एल्ब्यूमिन' के लिए पहले साल में कोटा 200 टन, दूसरे साल में 1,500 टन, तीसरे साल में 2,000 टन और चौथे साल में 2,500 टन होगा। पांचवें साल से यह सालाना 3,000 टन होगा। इन आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क लगेगा। मानुका शहद के लिए पहले साल में कोटा 40 टन और दूसरे साल से आगे सालाना 200 टन होगा।
भाषा अजय पाण्डेय
अजय