नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) सरकार ने कांग्रेस द्वारा सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग पर सवाल उठाते हुए सोमवार को कहा कि परिसीमन से जुड़े महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए विपक्ष के साथ संवाद के लगातार प्रयास किए गए हैं और अब सभी दलों से रचनात्मक सहयोग की जरूरत है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे गए जवाबी पत्र में कहा कि सरकार राष्ट्रीय महत्व के सभी विषयों पर विचार-विमर्श और चर्चा में सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी को महत्व देती है और इसी नजरिये से द्रमुक, समाजवादी पार्टी (सपा) तथा कई अन्य दलों के साथ बातचीत की गई।
उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस रचनात्मक भूमिका निभाएगी और भविष्य के महत्वपूर्ण विधेयकों के मार्ग में बाधा नहीं डालेगी।
इससे पहले, खरगे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को संसद में पेश किए जाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
रीजीजू ने कहा, ‘‘मैं कुछ बिंदुओं को स्पष्ट करने और इस विषय पर विपक्ष के साथ संवाद के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों से जुड़े तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने के लिए आपको यह पत्र लिख रहा हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आपने कहा कि 13 अगस्त, 2026 को दोनों सदनों की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बीत जाने के बावजूद संसद का सत्रावसान नहीं किया गया है। इस पर मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद किसी निश्चित अवधि के भीतर उसका सत्रावसान करने की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है।’’
संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि इतने अंतराल के दौरान किसी सदन का सत्रावसान नहीं किया जाना अपने आप में किसी संवैधानिक या प्रक्रियागत अनुचित स्थिति अथवा अनियमितता को जन्म नहीं देता।
उन्होंने कहा कि अतीत में ऐसे अनेक उदाहरण रहे हैं, जब सदनों का 87 दिन तक सत्रावसान नहीं किया गया।
रीजीजू ने कहा कि वर्ष 2008 में लोकसभा की बैठक विश्वास मत के लिए 21 और 22 जुलाई को दो दिन हुई थी। इसके बाद सदन का सत्रावसान नहीं किया गया और 17 अक्टूबर 2008 को फिर बैठक हुई। इसके बाद सदन को 24 अक्टूबर को स्थगित कर दिया गया और अगली बैठक 10 दिसंबर को हुई।
उन्होंने कहा कि ऐसे कई अन्य उदाहरण भी हैं। इनमें वर्ष 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन, 2006 में 49 दिन, 2013 में 49 दिन और 1963 में 41 दिन तक सदन का सत्रावसान नहीं किया जाना शामिल है।
रीजीजू ने कहा, ‘‘दूसरा, सरकार ने परिसीमन संशोधन विधेयक पर विचार और इसे पारित कराने के लिए विपक्ष का समर्थन और सहयोग लगातार मांगा है। प्रमुख विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस से सरकार ने कई मौकों पर संपर्क किया है।’’
मंत्री ने कहा कि उन्होंने इस वर्ष 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल को खरगे को पत्र लिखा था तथा उनसे व्यक्तिगत रूप से भी इस विषय पर चर्चा कर समर्थन और सहयोग मांगा था।
रीजीजू का कहना है कि मानसून सत्र के दौरान उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की और उनका सहयोग मांगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद कांग्रेस पार्टी ने चर्चा के लिए तारीखें नहीं दीं, जिसके बाद सरकार ने अन्य राजनीतिक दलों से भी संपर्क किया।’’
रीजीजू ने कहा, ‘‘प्रस्तावित विधेयक के समर्थन में संवाद को सुगम बनाने और व्यापक सहमति कायम करने के उद्देश्य से द्रमुक, समाजवादी पार्टी (सपा), वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), शिवसेना (उबाठा), एआईएमआईएम और बीजू जनता दल (बीजद) सहित विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया गया।’’
मंत्री ने कहा कि इन परिस्थितियों में यह स्पष्ट नहीं है कि परामर्श की मांग बार-बार क्यों की जा रही है, जबकि सरकार संवाद के लिए पहले ही लगातार प्रयास कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि अब जरूरत विपक्षी दलों के रचनात्मक सहयोग की है, न कि पहले हो चुके विचार-विमर्श को ध्यान में रखे बिना उसी मांग को बार-बार दोहराने की।
रीजीजू ने पत्र में कहा, ‘‘ये प्रयास परामर्श और रचनात्मक संसदीय संवाद के प्रति सरकार की दृढ़ इच्छा को दर्शाते हैं। मैं दोहराता हूं कि सरकार संसदीय लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है और संसद के प्रभावी कामकाज के जरिये सार्थक संवाद को सुगम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।’’
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