नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) भारत के महापंजीयक (आरजीआई) ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के जनगणना निदेशालयों को 24 घंटे सोशल मीडिया निगरानी प्रकोष्ठ संचालित करने का निर्देश दिया है जिसका उद्देश्य डिजिटल मंचों पर होने वाली चर्चाओं पर नजर रखना तथा भ्रामक खबरों का तत्काल खंडन करने के साथ वास्तविक तथ्य पेश करना है।
आरजीआई की ओर से ये निर्देश ऐसे समय में दिए गए हैं जब विभिन्न राज्यों में जनगणना के दूसरे चरण यानी आबादी गणना की जल्द शुरुआत होने वाली है।
सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजे गए पत्र में आरजीआई मृत्युंजय कुमार नारायण ने यह भी कहा कि रक्षा मंत्रालय से मंजूरी मिलने पर अगले वर्ष गणतंत्र दिवस पर जनगणना से संबंधित एक झांकी प्रदर्शित की जा सकती है।
नारायण ने जनगणना के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न स्तरों पर किए जाने वाले प्रयासों का ब्योरा देते हुए कहा कि जनगणना के दौरान चलाए जाने वाले अभियान में लोगों को न केवल घर-घर जाकर पूछे जाने वाले प्रश्नों की जानकारी दी जाएगी, बल्कि उन्हें डिजिटल माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। इस सुविधा के जरिए नागरिक घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
पत्र में कहा गया है, ‘‘जनगणना निदेशालयों को सलाह दी जाती है कि वे डिजिटल मंचों पर होने वाली चर्चाओं और टिप्पणियों पर 24 घंटे नजर रखने के लिए प्रभावी सोशल मीडिया निगरानी प्रकोष्ठ स्थापित करें। इससे किसी भी प्रतिकूल टिप्पणी, भ्रामक दावे या स्थानीय स्तर पर फैली गलतफहमी का तत्काल जवाब दिया जा सकेगा और संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की व्यवस्था के माध्यम से प्रामाणिक खंडन तथा सटीक जानकारी दी जा सकेगी।’’
आजादी के बाद यह आठवीं जनगणना होगी, जिसे दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहला चरण ‘मकान सूचीकरण एवं आवास गणना’ और दूसरा चरण ‘आबादी गणना’ है।
भाषा खारी अविनाश
अविनाश