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सड़क हादसे में पैर गंवा चुकी महिला को 2.55 करोड रुपये मुआवजा दिया जाए: न्यायाधिकरण

नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली के एक मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने ट्रक से अपने स्कूटर में टक्कर लगने पर अपना बायां पैर गंवा चुकी 26 वर्षीय एक उद्यमी को 2.55 करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है।

पीठासीन अधिकारी गुंजन गुप्ता पीड़ित रीना की एक दावा याचिका पर सुनवाई कर रही थीं। उन्होंने ट्रक की बीमा कंपनी, 'नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड' को निर्देश दिया कि वह 30 दिनों के भीतर 2.55 करोड़ रुपये का भुगतान करे, जिस पर 22 फरवरी 2025 से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

न्यायाधिकरण ने 15 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘इस फैसले के पिछले हिस्से में आकलन किया गया है कि याचिकाकर्ता की कार्यात्मक अक्षमता शत-प्रतिशत है। इस अक्षमता और इसके कारण आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए और इसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं होने के कारण, याचिकाकर्ता अब वैसा जीवन नहीं जी पाएगी जैसा वह दुर्घटना से पहले जीती थी।’’

यह हादसा पांच नवंबर 2024 को पीरागढ़ी चौक पर हुआ। रीना अपने दो साल के बेटे के साथ स्कूटर पर पीछे बैठी थी, तभी एक ट्रक ने स्कूटर को टक्कर मार दी। ट्रक का एक पहिया उसके बाएं पैर के ऊपर से गुजर गया, जिसे बाद में काटना पड़ा। उसकी तीन सर्जरी हुईं।

बीमा कंपनी ने स्कूटर चालक को दोषी ठहराया और तर्क दिया कि महिला ने हेलमेट नहीं पहना था। न्यायाधिकरण ने इन तर्कों को खारिज कर दिया और कहा कि लापरवाही से गाड़ी तेज चलाने के बारे में रीना की गवाही का कोई खंडन नहीं किया गया।

ट्रक का चालक और मालिक महिंदर सिंह न्यायाधिकरण के सामने पेश नहीं हुआ, जिसके चलते उसके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला गया।

मुआवजे का बड़ा हिस्सा, यानी 1.68 करोड़ रुपये, भविष्य में कमाई की क्षमता के नुकसान के लिए दिया गया था। हालांकि बाएं पैर की विकलांगता 80 प्रतिशत प्रमाणित की गई थी, लेकिन न्यायाधिकरण ने कार्यात्मक विकलांगता शत-प्रतिशत मानी, क्योंकि रीना को अपना व्यवसाय बंद करना पड़ा था।

शीर्ष अदालत के हालिया फैसले का हवाला देते हुए न्यायाधिकरण ने उनकी मासिक आय 58,915 रुपये मानी, जिसमें एक गृहिणी के रूप में उनके योगदान के लिए 6,000 रुपये भी शामिल थे। उनके तीन बच्चे हैं, जिनकी उम्र दो से चार साल के बीच है।

न्यायाधिकरण ने कहा कि बिल न होने के आधार पर चिकित्सा खर्चों के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। उसने यह भी कहा कि कोई दोषी व्यक्ति पीड़ित की मेडिक्लेम पॉलिसी का फायदा नहीं उठा सकता।

न्यायाधिकरण ने पीड़ित को विभिन्न मदों के तहत कुल 2.55 करोड़ रुपये दिए जाने का फैसला सुनाया।

भाषा राजकुमार अविनाश

अविनाश