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लघु सिंचाई योजनाओं की संख्या कई राज्यों में बढ़ी, आठ राज्यों में आई गिरावट: रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) देश के कई राज्यों में लघु सिंचाई योजनाओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश 44.29 लाख योजनाओं के साथ पहले स्थान पर रहा जबकि आठ राज्यों में इनकी संख्या में गिरावट दर्ज की गई। सातवीं लघु सिंचाई गणना की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई।

रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान, तमिलनाडु, पंजाब, मणिपुर, केरल, झारखंड, मिजोरम और त्रिपुरा में लघु सिंचाई योजनाओं की संख्या घटी है।

वहीं, छठी गणना की तुलना में उत्तर प्रदेश में 11.38 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 9.84 प्रतिशत, तेलंगाना में 9.6 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 7.15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

‘सातवीं लघु सिंचाई गणना रिपोर्ट, खंड-दो, भाग-दो’ में उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़े शामिल हैं, जिन्होंने गणना का काम पहले पूरा कर लिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 44.29 लाख लघु सिंचाई योजनाएं, वहीं महाराष्ट्र में 38.28 लाख, तमिलनाडु में 20.81 लाख और तेलंगाना में 18.41 लाख योजनाएं दर्ज की गईं।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने 25 सितंबर को नयी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित नौवें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह के समापन सत्र के दौरान यह रिपोर्ट जारी की।

सातवीं गणना में उत्तर प्रदेश में 44.29 लाख लघु सिंचाई योजनाएं दर्ज की गईं, जबकि छठी जनगणना में यह संख्या 39.76 लाख थी।

वहीं महाराष्ट्र में लघु सिंचाई योजनाओं की संख्या छठी जनगणना के 35.73 लाख से बढ़कर 38.28 लाख हो गई।

तेलंगाना में सातवीं गणना के दौरान 18.41 लाख लघु सिंचाई योजनाएं दर्ज की गईं, जबकि छठी जनगणना में यह संख्या 16.80 लाख थी।

आंध्र प्रदेश में लघु सिंचाई योजनाओं की संख्या छठी जनगणना के 11.91 लाख थी, जो सातवीं गणना में बढ़कर 13.08 लाख हो गई।

राजस्थान में कुल 13.77 लाख लघु सिंचाई योजनाएं दर्ज की गईं। इनमें 13.62 लाख भूजल पर और 15,341 सतही जल पर आधारित थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में छठी गणना की तुलना में भूजल पर आधारित योजनाओं की संख्या में 7.6 प्रतिशत और सतही जल पर आधारित योजनाओं की संख्या में पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

तमिलनाडु में लघु सिंचाई योजनाओं की संख्या छठी गणना में 21.15 लाख थी, जो 1.63 प्रतिशत घटकर 20.81 लाख रह गई।

पंजाब में सातवीं लघु सिंचाई गणना के दौरान 11.58 लाख योजनाएं दर्ज की गईं, जबकि छठी जनगणना में इनकी संख्या 11.75 लाख थी।

केरल में लघु सिंचाई योजनाओं की संख्या छठी जनगणना के 92,574 से 22.44 प्रतिशत घटकर 71,799 रह गई।

झारखंड में सातवीं जनगणना के दौरान 2.17 लाख लघु सिंचाई योजनाएं दर्ज की गईं, जबकि छठी जनगणना में इनकी संख्या 2.53 लाख थी।

मणिपुर में सातवीं लघु सिंचाई गणना के दौरान 762 योजनाएं दर्ज की गईं, जबकि छठी जनगणना में इनकी संख्या 971 थी।

मिजोरम में लघु सिंचाई योजनाओं की संख्या पिछली गणना में 2,480 से घटकर 1,570 रह गई।

त्रिपुरा में सातवीं गणना के दौरान 4,982 लघु सिंचाई योजनाएं दर्ज की गईं, जबकि छठी जनगणना में इनकी संख्या 5,273 थी।

लघु सिंचाई योजनाओं में भूजल या सतही जल का उपयोग करने वाली वे योजनाएं शामिल हैं, जिनका व्यक्तिगत कृषि योग्य सिंचाई क्षेत्र 2,000 हेक्टेयर तक होता है।

इनके अंतर्गत खोदे गए कुएं, उथले नलकूप, मध्यम गहराई वाले नलकूप, गहरे नलकूप, सतही जल प्रवाह आधारित योजनाएं शामिल हैं।

भाषा जितेंद्र प्रशांत

प्रशांत