नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार को एनडीएमसी क्षेत्र की ऊंची इमारतों में ‘एंटी-स्मॉग गन’ और ‘वॉटर मिस्ट’ प्रणाली का निरीक्षण किया, तथा चेतावनी दी कि प्रदूषण नियंत्रण के तय नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी बयान के अनुसार, निरीक्षण के दौरान सिरसा ने उपकरणों की स्थापना और उनके काम करने की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नियमों का उल्लंघन करने वाले भवनों, होटलों, निर्माण स्थलों और अन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई करें।
निर्धारित नियमों के अनुसार, भूतल के अलावा पांच या उससे अधिक मंजिल वाली और 3,000 वर्ग मीटर से अधिक कुल निर्मित क्षेत्र वाले वाणिज्यिक, संस्थागत और आतिथ्य भवनों में धूल उत्सर्जन को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली लगाना अनिवार्य है।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय केवल ‘एंटी-स्मॉग गन’ और ‘वॉटर मिस्ट’ प्रणाली लगाने तक ही सीमित नहीं होने चाहिए; इसके बजाय, निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रित करने के नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, साथ ही निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन से जुड़े नियमों का भी सख्ती से पालन होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि निर्माण या तोड़फोड़ कार्यों के दौरान निर्धारित दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सिरसा ने यह भी कहा कि बीएस-6 उत्सर्जन मानक से नीचे वाले वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर लगी पाबंदियां एक नवंबर से लागू हो जाएंगी। उन्होंने वाहन मालिकों से इन नियमों का पालन करने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि उनके वाहनों का वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र हो।
मंत्री ने बताया कि एक अक्टूबर से एआई-सक्षम कमांड एवं नियंत्रण केंद्र, 60 निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन और 334 प्रवर्तन टीम चौबीसों घंटे प्रदूषण से जुड़ी गतिविधियों पर नज़र रख रही हैं।
बयान में कहा गया कि प्रवर्तन अभियान के तहत, नियमों का पालन न करने वाली 2,200 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को सील कर दिया गया है।
भाषा नेत्रपाल सुरेश
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