नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम.ए. बेबी ने सोमवार को आरोप लगाया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘‘सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त निजी संस्थानों’’ के शिक्षकों को प्रगणक नियुक्त करने की अनुमति देने के लिए जनगणना नियमों में किया गया बदलाव ‘‘संघ परिवार को पिछले दरवाजे से प्रवेश’’ का मौका देगा।
बेबी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में सरकार से जनगणना की कार्यप्रणाली को लेकर सर्वदलीय विचार-विमर्श की मांग भी की।
केंद्र ने 16 अक्टूबर को जनगणना नियम, 1990 में संशोधन किया था। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त निजी संस्थानों के शिक्षकों को प्रगणक नियुक्त करने की अनुमति दी गई है।
बेबी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जनगणना नियमों में किए गए संशोधन उतने सहज नहीं हैं, जितने वे दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि नए संशोधनों के तहत निजी स्कूलों के शिक्षकों, संस्थाओं, सोसायटी और ट्रस्ट के सदस्यों तथा राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा ‘‘उपयुक्त’’ समझे जाने वाले किसी भी व्यक्ति को प्रगणक बनाया जा सकता है।
बेबी ने दावा किया, ‘‘यह भारतीय नागरिकों के निजी आंकड़ों तक पहुंच के लिए संघ परिवार को पिछले दरवाजे से प्रवेश दिलाने का माध्यम है।’’
उन्होंने कहा कि माकपा ने 24 अगस्त को भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त को एक ज्ञापन देकर दूसरे चरण की प्रश्नावली में आधार, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट, मोबाइल नंबर, बैंक खातों के विवरण तथा माता-पिता के धर्म एवं जन्मस्थान जैसी व्यक्तिगत जानकारियां एकत्र नहीं करने की मांग की थी।
बेबी ने आरोप लगाया कि ऐसी व्यक्तिगत जानकारियां जुटाने के लिए ‘‘संघ परिवार के एजेंट’’ को तैनात करने से जनगणना का इस्तेमाल नागरिकता निर्धारण और मतदाताओं को बाहर करने के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह स्वीकार नहीं किया जा सकता। अधिसूचित संशोधन वापस लिए जाएं और जनगणना की कार्यप्रणाली पर तत्काल सर्वदलीय विचार-विमर्श हो। जनगणना को मोदी-अमित शाह-मोहन भागवत के हाथों अगला एसआईआर नहीं बनने दिया जाना चाहिए।’’
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