नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अक्टूबर को दिल्ली में 8,941 करोड़ रुपये की अवजल से जुड़ी कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने सोमवार को यह जानकारी दी।
वर्मा ने “यमुना के साथ जन्मदिन” नामक एक पहल की भी घोषणा की, और लोगों से आग्रह किया कि वे अपना जन्मदिन नदी के किनारे मनाएं।
उन्होंने कहा, “यमुना के किनारे झोपड़ियां बनाई जाएंगी, जहां दिल्लीवासी अपना जन्मदिन मना सकेंगे। मैं सभी दिल्लीवासियों से अपील करता हूं कि वे अपना जन्मदिन मां यमुना के साथ मनाएं। मैं अपना जन्मदिन भी सात नवंबर को वहीं मनाऊंगा।”
वर्मा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इन परियोजनाओं की शुरुआत नजफगढ़ इलाके से की जाएगी; इनमें विकेंद्रीकृत अवजल शोधन संयंत्र (डीएसटीपी) और नयी सीवर लाइन शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “बाहरी दिल्ली में 29 नए डीएसटीपी और अवजल पंपिंग स्टेशन के दायरे में 358 अनधिकृत कॉलोनियां और 113 गांवों आएंगे, जिससे 36.29 लाख निवासियों को फायदा होगा। इसके अलावा, 1,034 किलोमीटर लंबा नया सीवर नेटवर्क बिछाने की एक और परियोजना भी शुरू की जाएगी।”
वर्मा ने कहा कि प्रमुख परियोजनाओं में ओखला में 124 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) की क्षमता वाला एक नया अवजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) शामिल है। इसके अलावा, पहले से मौजूद आठ एसटीपी को भी उन्नत किया जाएगा, जिससे उनकी कुल क्षमता 78.2 एमजीडी से बढ़कर 140.8 एमजीडी हो जाएगी और इससे लगभग 78.5 लाख लोगों को फायदा मिलेगा।
उन्होंने कहा, “अगले दो से ढाई वर्षों में जब ये सभी काम पूरे हो जाएंगे, तो दिल्ली से अशोधित गंदा पानी नालों में और उनके जरिए यमुना नदी में नहीं जाएगा। तब हम अपनी पवित्र नदी पर इन प्रयासों का असर देख सकेंगे।”
दिल्ली सरकार ने पहले घोषणा की थी कि वह अवजल शोधन में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के माध्यम से लगभग 29 विकेंद्रीकृत अवजल शोधन संयंत्र स्थापित करेगी।
वर्मा ने बताया कि जहां पर जगह की कमी के कारण बड़े अवजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) नहीं बनाए जा सकते, वहां डीजेबी स्थानीय स्तर पर अपशिष्ट जल के शोधन के लिए 40 डीएसटीपी लगाने की योजना बना रहा है।
उन्होंने कहा, “घाटों की सफाई हमारे इरादे को दर्शाती है। अवजल को नदी में जाने से रोकना ही इसका स्थायी समाधान है। अवजल की हर एक बूंद को इकट्ठा किया जाएगा, उसे शोधित किया जाएगा और फिर से इस्तेमाल में लाया जाएगा। इन 43 परियोजनाओं के पीछे यही वादा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में यमुना घाटों पर चलाए गए सफाई अभियान में लगभग 35,000 निवासियों ने हिस्सा लिया।
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