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उच्चतम न्यायालय ने धोखाधड़ी मामले में महिला को अग्रिम जमानत दी

नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने धोखाधड़ी के मामले में एक महिला को यह देखते हुए अग्रिम जमानत दे दी कि वह जांच में सहयोग कर रही है।

न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने महिला को वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420, 468, 471 और 34 के तहत दर्ज एक मामले में राहत दी।

निधि नेहरा शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने कंपनी की देनदारियां चुकाने के नाम पर एक व्यक्ति को गलत जानकारी देकर बड़ी रकम अंतरित करने के लिए राजी किया।

आरोप है कि उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया और कथित तौर पर जाली दस्तावेज दिखाकर शिकायतकर्ता को धोखा दिया।

पीठ ने कहा, “इस मामले के तथ्यों व परिस्थितियों और याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों पर विचार करने के बाद हमारी राय है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ उपलब्ध सबूतों के आधार पर अग्रिम जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए हमारा आदेश है कि उपरोक्त अपराध के संबंध में यदि याचिकाकर्ता को गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे जमानत पर रिहा किया जाए। इस संबंध में जांच अधिकारी उचित शर्तें तय कर सकते हैं।”

शर्मा की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अश्विनी दुबे ने दलील दी कि वह जांच में सहयोग कर रही हैं।

न्यायालय ने निर्देश दिया कि जमानत पर रिहा होने के बाद याचिकाकर्ता संबंधित क्षेत्राधिकार वाली अदालत में पेश हों, नए जमानत बांड भरें और मुकदमे की सुनवाई के दौरान उपस्थित हों।

पीठ ने कहा कि यदि अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो राज्य सरकार अग्रिम जमानत रद्द कराने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकती है।

शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को पासपोर्ट पुलिस के पास जमा करने का भी निर्देश दिया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, बुलवार्क फैसिलिटीज मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े विवादों के बाद शर्मा और अन्य आरोपियों ने दावा किया था कि वे कंपनी की देनदारियों को निपटाने में मदद कर सकते हैं।

वे कथित तौर पर 1.30 करोड़ रुपये के लेनदेन में शामिल रहे।

भाषा जोहेब नरेश

नरेश