नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने एक पूर्व छात्रा से दुष्कर्म करने और उसके आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने की धमकी देने के मामले में एक आरोपी प्रोफेसर को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है।
अदालत ने कहा कि दोनों के बीच व्हाट्सऐप पर हुई बातचीत से पता चलता है कि यह मामला केवल आपसी सहमति से बने पुराने संबंध का नहीं, बल्कि इसमें जोर-जबरदस्ती और डराने-धमकाने की बात शामिल है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गोमती मनोचा ने कहा कि आरोपी को अग्रिम जमानत दिए जाने पर पीड़िता को प्रभावित करने या धमकाने, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने और दोबारा धमकी देने या दबाव बनाने का गंभीर खतरा है।
एक विश्वविद्यालय के आरोपी प्रोफेसर की याचिका पर सुनवाई कर रही अदालत ने निष्पक्ष जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए मामले की जांच एक नामित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया।
अदालत ने जांच अधिकारी से इस आरोप की भी जांच करने को कहा कि क्या आरोपी या उसके सहयोगी मामला आगे नहीं बढ़ाने के लिए पीड़िता पर दबाव डाल रहे हैं।
अदालत ने 12 अक्टूबर के आदेश में कहा, ‘‘समुचित न्याय के लिए अदालत यह आवश्यक समझती है कि जांच एक नामित वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए, ताकि मूल मोबाइल फोन हासिल करने और उसे सुरक्षित रखने के लिए उचित जांच की जा सके। इससे पीड़िता और आरोपी, दोनों के साथ निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।’’
अदालत ने कहा कि आपत्तिजनक वीडियो बनाए जाने और उन्हें वायरल करने की धमकी देने के आरोपों से गवाहों को प्रभावित करने तथा शिकायतकर्ता पर लगातार दबाव बनाए रखने की आशंका पैदा होती है।
भाषा संतोष सुरेश
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