नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत की गई एक अपील को नए सिरे से विचार करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पास वापस भेज दिया है। आयोग ने मंत्रालय के प्रथम अपीलीय प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि वह आवेदक को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान करे।
आवेदक चयन घोष चौधरी ने ‘ऑरेलियनो फर्नांडीस बनाम गोवा राज्य’ मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए दावा किया कि बैंक ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013’ (पॉश) के तहत अनिवार्य ‘आंतरिक समितियां’ गठित करने में विफल रहे हैं।
उन्होंने ‘शी-बॉक्स’ (यौन उत्पीड़न संबंधी इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स) पोर्टल पर पंजीकृत बैंकों, कानून के तहत जमा किए गए वार्षिक रिटर्न, नियमों का पालन नहीं करने पर लगाए गए दंड और पीड़ित महिलाओं से जुड़े अदालती मामलों का विवरण मांगा है।
‘शी-बॉक्स’ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों को दर्ज करने और उन पर नजर रखने के लिए केंद्र सरकार का एक ऑनलाइन मंच है।
आवेदक ने दलील दी कि मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी अधूरी थी और प्रथम अपील में विशेष रूप से अनुरोध किए जाने के बावजूद उसे सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया।
मंत्रालय ने कहा कि उसने अपने पास उपलब्ध जानकारी मुहैया करा दी थी। उसने बताया कि बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र के लिए ‘वित्तीय सेवा विभाग’ नोडल विभाग है। साथ ही, उसने आवेदक को विशिष्ट जानकारी के लिए अलग-अलग बैंकों के जन सूचना अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी।
इसमें यह भी बताया गया कि संबंधित विभाग के पास सार्वजनिक क्षेत्र के अलग-अलग बैंकों से जुड़े वार्षिक रिटर्न, जुर्माने और मुकदमों की जानकारी समेकित रूप में उपलब्ध नहीं है, जिसकी मांग की गई थी।
हाल के एक आदेश में सूचना आयुक्त पी. आर. रमेश ने मंत्रालय के प्रथम अपीलीय प्राधिकरण (एफएए) को निर्देश दिया कि वह दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का मौका दे, अपील पर पुनर्विचार करे और तर्कपूर्ण आदेश जारी करे।
आयोग ने मंत्रालय की उस बयान पर भी गौर किया जिसमें मंत्रालय ने कहा था कि पहली अपील का निपटारा कर दिया गया है, लेकिन उस आदेश की कोई प्रति रिकॉर्ड पर नहीं रखी गई थी।
आदेश में कहा गया, ‘‘इन परिस्थितियों में आयोग यह सत्यापित करने में असमर्थ है कि प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (एफएए) ने जो आदेश पारित करने की बात कही है, उसमें क्या लिखा है और क्या आवेदक के व्यक्तिगत सुनवाई के अनुरोध पर विचार किया गया था।’’
सीआईसी ने कहा कि प्रथम अपील पर आवेदक की ओर से उठाए गए मुद्दों को संबोधित करते हुए कारणों सहित आदेश के जरिए निर्णय लिया जाना चाहिए।
भाषा सुरभि नरेश
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