नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सार्वजनिक परीक्षाओं की व्यवस्था में प्रणालीगत और डिजिटल खामियों का आकलन करने के लिए स्वतंत्र बहु-विषयक विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश से संबंधित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दीन दयाल सैनी की ओर से दायर जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस उद्देश्य के लिए केंद्र सरकार पहले ही एक उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल का गठन कर चुकी है।
पीठ ने कहा, ‘‘सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया कि कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय ने एक उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल का गठन किया है और इस कार्यबल ने 13 सितंबर, 2026 तक सुझाव आमंत्रित किए थे।’’
शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता ने उक्त कार्यबल के समक्ष अपना पक्ष रखने के अवसर का लाभ नहीं उठाया। इसके अलावा, सक्षम प्राधिकारी इस मुद्दे पर पहले ही संज्ञान ले चुका है। इसलिए, इस याचिका पर विचार करने का कोई आधार नहीं बनता। अतः याचिका खारिज की जाती है।’’
याचिका में समिति को याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तावित ‘‘स्थायी सुरक्षित डिजिटल परीक्षा बुनियादी ढांचे के हाइब्रिड हब-एंड-स्पोक मॉडल’’ की स्वतंत्र रूप से जांच और मूल्यांकन करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया।
याचिका के अनुसार, यह मॉडल एक केंद्रीकृत और अत्यधिक सुरक्षित ढांचा है, जिसे परीक्षा में गड़बड़ियों, प्रश्नपत्र लीक होने और संचालन संबंधी खामियों को दूर करने के लिए तैयार किया गया है।
भाषा आशीष प्रशांत
प्रशांत