नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2008 में अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में संलिप्तताा के लिए दोषी ठहराए गए इंडियन मुजाहिदीन के एक सदस्य को सुनाई गई मौत की सजा पर रोक लगा दी है। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने दोषी मोहम्मद तनवीर की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई।
तनवीर ने गुजरात उच्च न्यायालय के सात जुलाई के फैसले को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने सात जुलाई को सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के 38 सदस्यों की मौत की सजा बरकरार रखी थी।
उच्च न्यायालय ने सजा बरकरार रखने के प्रमुख कारणों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत, साजिश की व्यापकता और बड़े पैमाने पर आतंक फैलाने के इरादे का उल्लेख किया था।
अहमदाबाद के विभिन्न इलाकों में 26 जुलाई, 2008 को 70 मिनट के भीतर 21 बम धमाके हुए थे। इनमें 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे।
उच्चतम न्यायालय ने नौ अक्टूबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘अपीलकर्ता (तनवीर) को सुनाई गई मौत की सजा पर रोक रहेगी।’’ न्यायालय ने निचली अदालत और उच्च न्यायालय से मामले के मूल रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार को आठ सप्ताह के भीतर तनवीर से संबंधित सभी परिवीक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट पेश करने को कहा।
उसने संबंधित जेल अधीक्षक को भी आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया, जिसमें जेल में तनवीर द्वारा किए गए काम की प्रकृति तथा उसके आचरण और व्यवहार का ब्योरा हो।
मामले की अगली सुनवाई 12 सप्ताह बाद होगी।
भाषा संतोष नरेश
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