कोलकाता, 19 अक्टूबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सुजान चक्रवर्ती ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बंगाल के हिंदुओं का ‘‘दुश्मन’’ करार देते हुए कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान राज्य में वामपंथी दलों द्वारा लगाए गए कई 'बुकस्टॉल' में की गई तोड़फोड़ लोकतांत्रिक सोच पर हमला है।
माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य चक्रवर्ती ने कहा कि भाजपा पश्चिम बंगाल में बंगाली हिंदुओं के हितों की रक्षा करने का वादा करके सत्ता में आई थी लेकिन उसके कृत्य इसके विपरीत हैं।
यादवपुर के पूर्व सांसद ने कहा, ‘‘वे बंगाल के हिंदुओं के दुश्मन हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुओं के हितों का रक्षक होने का दावा करने वाली भाजपा उनके खिलाफ काम कर रही है।
चक्रवर्ती ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में भाजपा पर बंगाल के हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहार दुर्गा पूजा के दौरान अशांति पैदा करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “यह शरद उत्सव पीढ़ियों से मनाया जा रहा है और वामपंथी दल 1952 के आसपास से ही पूजा पंडालों के पास बुकस्टॉल लगाते आ रहे हैं।”
माकपा, एसयूसीआई और अन्य वामपंथी दलों ने आरोप लगाया है कि कूचबिहार जिले के दिनहाटा से लेकर दक्षिण कोलकाता के हरिदेवपुर तक राज्य में कई स्थानों पर उनके 'बुकस्टॉल' में तोड़फोड़ की गई।
चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘हमलावर किताबों और लोकतांत्रिक विचारों से डरते हैं और यही वजह है कि उन्होंने बुकस्टॉल में तोड़फोड़ की।’’
राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने भी तोड़फोड़ की घटनाओं की निंदा की। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें नहीं पता कि इन हमलों के पीछे कौन था या उनका राजनीतिक झुकाव क्या था।
दुर्गा पूजा के एक पंडाल के दौरे के दौरान एक बंगाली समाचार चैनल से बातचीत में दासगुप्ता ने कहा, ‘‘मुझे शर्मिंदगी है कि ऐसी घटना हुई। इस तरह की घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए।’’
विचारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर देते हुए दासगुप्ता ने कहा, ‘‘वामपंथियों के साथ मेरे वैचारिक मतभेद हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं उन्हें किताबें प्रदर्शित करने या बेचने की अनुमति नहीं दूंगा।’’
सितंबर में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दुर्गा पूजा समितियों से कहा था कि यदि माकपा के बुकस्टॉल में उत्सव के लिए ‘दुर्गा पूजा’ के बजाय ‘शारदोत्सव’ (शरद ऋतु का उत्सव) शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, तो उन्हें पंडालों के बाहर ऐसे स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं दी जाए।
भाषा प्रचेता प्रशांत
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