नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने यौन उत्पीड़न की शिकार 16-वर्षीय एक लड़की को 31 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी और कहा कि नाबालिग से यह उम्मीद करना उचित नहीं होगा कि वह बच्चे को जन्म देने और उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी उठाए।
उच्च न्यायालय ने कहा कि नाबालिग से दुष्कर्म होने की स्थिति में गर्भपात की अनुमति देने के मामले को केवल यौन उत्पीड़न की शिकार महिला के अधिकार के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसे मानवाधिकार के रूप में भी मान्यता दी जानी चाहिए।
अदालत ने कहा कि यदि गर्भपात की अनुमति नहीं दी जाती है, तो इससे पीड़िता के गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार पर असर पड़ेगा।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने कहा, “इसलिए यह माना गया है कि नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता से बच्चे को जन्म देने और उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी उठाने की उम्मीद करना उचित नहीं होगा, खासकर ऐसी स्थिति में जब वह खुद किशोरावस्था से गुजर रही है।”
चिकित्सकीय रूप से गर्भपात संबंधी अधिनियम के तहत सामान्य मामलों में 20 सप्ताह तक के गर्भ को और दुष्कर्म पीड़िताओं जैसी कुछ विशेष श्रेणियों में 24 सप्ताह तक के गर्भ को समाप्त किया जा सकता है।
अदालत ने कहा कि चिकित्सा बोर्ड की राय के अनुसार, लड़की गर्भपात की प्रक्रिया से गुजरने के लिए चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ है।
इसके बाद, अदालत ने नाबालिग पीड़िता के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए गर्भपात की अनुमति दे दी।
अदालत को बताया गया कि पीड़िता को पहले ही यहां लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है।
अदालत ने चिकित्सकों को भ्रूण के ऊतकों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया, ताकि आपराधिक मामले में जरूरी डीएनए जांच की जा सके।
अदालत ने राज्य सरकार को गर्भपात की चिकित्सकीय प्रक्रिया का पूरा खर्च उठाने का निर्देश दिया, साथ ही यह भी कहा कि यदि बच्चा जीवित पैदा होता है, तो अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि बच्चे को हरसंभव सहायता दी जाए।
अदालत ने कहा, “ऐसी स्थिति में नाबालिग और उसके परिवार की इच्छा के अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया के तहत बच्चे को गोद देने की व्यवस्था की जाए। याचिकाकर्ता एवं नाबालिग पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए।”
अदालत ने यह आदेश लड़की की ओर से दायर याचिका पर दिया। यौन उत्पीड़न के बाद लड़की गर्भवती हो गई थी। पीड़िता की मां का कहना है कि गर्भावस्था जारी रहने से नाबालिग याचिकाकर्ता को गंभीर मानसिक आघात पहुंचेगा।
भाषा जोहेब सुरेश
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