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चयन की वेदी पर केवल पात्रता को मान्यता मिले : न्यायमूर्ति विक्रम नाथ

प्रयागराज, 19 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश विक्रम नाथ ने सोमवार को कहा कि न्याय का सिंहासन हो या चयन की वेदी, वहां किसी की व्यक्तिगत पहचान को नहीं, बल्कि केवल पात्रता को मान्यता मिलनी चाहिए।

प्रयागराज में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण और आदित्य पतंजलि योगपीठम का उद्घाटन करने के बाद न्यायमूर्ति नाथ उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, “न्यायालय में प्रभाव या सत्ता नहीं, साक्ष्य और तर्क बोलते हैं। ठीक उसी तरह, भर्ती में अनुग्रह या पहचान नहीं, केवल पात्रता बोलती है। यह अकाट्य सत्य है कि न्याय का सिंहासन हो या चयन की वेदी, वहां किसी की व्यक्तिगत पहचान को नहीं, बल्कि केवल पात्रता को मान्यता मिलनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोग पूरी निष्पक्षता से अपना काम कर सकें, इसके लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 तक व्यापक और सुदृढ़ प्रावधान किए गए हैं।

न्यायमूर्ति नाथ ने कहा कि आयोग महज परीक्षाओं का संचालन नहीं करते, बल्कि राष्ट्र के बेहतर भविष्य के लिए उत्कृष्ट लोकसेवकों का चयन भी करते हैं।

उन्होंने कहा, “आयोग की ओर से चुने गए हर प्रशासक के निर्णय के दूरगामी प्रभाव होते हैं। इसीलिए एक चयन आगामी दशकों के सुशासन का बीजारोपण है। यही आयोग के कामकाज की संप्रभु गंभीरता है।”

यूपीपीएससी के अध्यक्ष संजय श्रीनेत ने न्यायपालिका और चयन संस्थाओं के अंतर-संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा, “भले ही न्यायपालिका और चयन संस्थाओं के कार्यक्षेत्र अलग हों, लेकिन हमारी वैधानिक आत्मा एक ही है और दोनों का मूल तत्व लोक विश्वास है।”

श्रीनेत ने कहा कि जहां न्यायालय नागरिकों को न्याय का कानूनी आश्वासन देता है, वहीं चयन संस्थाएं उन्हें समान अवसर का संवैधानिक विश्वास प्रदान करती हैं।

आयोग के इतिहास में यह पहला मौका है, जब देश की शीर्ष अदालत के किसी सेवारत न्यायमूर्ति ने परिसर का आधिकारिक दौरा किया है। कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति नाथ ने ‘बोधि संगम’ का निरीक्षण किया, जिसे अभ्यर्थियों के लिए एक प्रेरणादायी स्थल के रूप में विकसित किया गया है।

न्यायमूर्ति नाथ ने परिसर में स्थित कल्पवृक्ष संग्रहालय का भी अवलोकन किया। वर्ष 1868 में ब्रिटिश कालीन क्लब से लेकर आयोग के स्टोर हाउस और अब ‘सांस्कृतिक विरासत एवं सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र’ बने इस भवन का पूर्व में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्घाटन किया था।

न्यायमूर्ति नाथ ने परिसर में ‘वृंदावन अधिकारी आवास’ के 12 नवनिर्मित आवासों के लोकार्पण के साथ ही ‘आयोग के आधिकारिक कैलेंडर’ का विमोचन किया। इसके अलावा, उन्होंने उत्कृष्ट सेवा देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अशोक भूषण, उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी, न्यायमूर्ति अजीत सिंह, न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा और अन्य न्यायाधीश मौजूद थे।

भाषा

राजेंद्र पारुल

पारुल