पणजी, 19 अक्टूबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पिछले सप्ताह गोवा पुलिस द्वारा हिरासत में लिये गए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के सात कार्यकर्ताओं में से छह की चिकित्सा रिपोर्ट सोमवार को रिकॉर्ड पर ली।
न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस और न्यायमूर्ति अमित जामसांडेकर की खंडपीठ ने पुलिस अधिकारियों द्वारा 11 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के फैसले का बचाव करते हुए दाखिल हलफनामों पर याचिकाकर्ताओं को जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी और मामले की सुनवाई तीन नवंबर के लिए स्थगित कर दी।
पीठ उन बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 11 अक्टूबर को आजाद मैदान में हुए प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिये जाने को चुनौती दी गई है।
अदालत ने सोमवार को उन सात में से छह प्रदर्शनकारियों की चिकित्सा रिपोर्ट औपचारिक रूप से रिकॉर्ड पर ली, जिनकी हिरासत से रिहाई के तुरंत बाद उसी दिन गोवा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में जांच की गई थी।
कार्यकर्ताओं अफरीन शेख, जैक सुखीजा, भूपेश बिंद, आदित्य परुलेकर, लिस्टन नोरोन्हा, शैमिनो फर्नांडिस और मिलिंद राणे को उस समय हिरासत में ले लिया गया था, जब पुलिस ने आजाद मैदान में उनके प्रस्तावित प्रदर्शन को रोक दिया था।
यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा था।
आयोजकों ने सात अक्टूबर को प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन जिला प्रशासन ने पुलिस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अनुरोध नौ अक्टूबर को खारिज कर दिया था।
हिरासत में लिये जाने के बाद प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की गईं। इसके बाद अदालत ने 11 अक्टूबर की देर रात विशेष सुनवाई की।
पीठ ने प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू नहीं होने के कारण हिरासत प्रथम दृष्टया अनधिकृत प्रतीत होती है।
अदालत ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट और पणजी एवं पेरनेम के पुलिस निरीक्षकों को भी हिरासत की परिस्थितियों के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद अधिकारियों ने हलफनामे दाखिल करके पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया और कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए यह कदम उठाना आवश्यक था।
पुलिस के हलफनामों के अनुसार, हिरासत में लिये गए छह लोगों को पेरनेम पुलिस थाने और एक व्यक्ति को पणजी पुलिस थाने ले जाया गया था। दुर्व्यवहार के आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस ने कहा कि चिकित्सा सहायता की पेशकश की गई थी। पुलिस ने यह भी कहा कि एक प्रदर्शनकारी को प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ते समय गिरने से मामूली चोटें आई थीं।
भाषा अमित प्रशांत
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