लखनऊ, 19 अक्टूबर (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है कि मुस्लिम युवाओं को नेहरू-गांधी या यादव नेताओं को चुनने के बजाय खुद नेतृत्व के लिए आगे आना चाहिए।
ओवैसी ने रविवार को रामपुर में चुनाव संबंधी एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि उनकी पार्टी मुस्लिम युवाओं को राजनीतिक मंच मुहैया कराने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा था कि मुस्लिम युवाओं में अन्य समुदायों के लोगों जैसी ही क्षमताएं मौजूद हैं, लेकिन अक्सर उन्हें नेतृत्व करने का मौका नहीं दिया जाता।
ओवैसी ने कहा था, “अब हम किसी भी नेहरू, गांधी या यादव को अपना नेता नहीं बनाएंगे। हमारी पंक्ति में खड़े युवा पुरुष और महिलाएं हमारे नेता बनेंगे।”
उन्होंने कहा था कि एआईएमआईएम चाहती है कि युवा विधायक और सांसद बनें, ताकि वे हाशिये पर पड़े समुदायों को न्याय दिला सकें।
स्थापित राजनीतिक परिवारों पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने आरोप लगाया था कि मुस्लिम कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर काम करने की उम्मीद की जाती है, जबकि अन्य समुदायों के नेता बड़े पदों पर आसीन होते हैं।
उन्होंने कहा था, “अब ‘अब्दुल’ नेता बनेगा, विधायक बनेगा और सांसद बनेगा।”
सपा प्रवक्ता अब्बास हैदर ने एआईएमआईएम प्रमुख की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ओवैसी देश में कहीं से भी चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के मतदाता राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और वे खुद तय करेंगे कि राज्य के लिए क्या बेहतर है।
हैदर ने उत्तर प्रदेश में 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में एआईएमआईएम के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा, “इस तरह के बयान कोई नयी बात नहीं हैं।” उन्होंने ओवैसी पर “समाज को बांटने वाला राजनीतिक एजेंडा” अपनाने का आरोप लगाया।
हैदर ने कहा, “उत्तर प्रदेश की जनता ऐसे नेतृत्व की तलाश में है, जो समाज को एकजुट करे, न कि ऐसी ताकतों की, जो लोगों को सांप्रदायिक या अन्य आधारों पर बांटती हों।”
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक), सामाजिक न्याय, रोजगार, समानता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा कि उनकी पार्टी उन लोगों के साथ राजनीतिक रूप से जुड़ नहीं सकती, जो महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू की विरासत का सम्मान नहीं करते।
राजपूत ने ओवैसी पर मौलाना अबुल कलाम आजाद की आलोचना करने का आरोप लगाया और कहा कि जो लोग ऐसे नेताओं को निशाना बनाते हैं, उन्हें देशभक्त नहीं माना जा सकता।
राजपूत ने आरोप लगाया कि ओवैसी अपने राजनीतिक भाषणों में धमकी-भरी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके बावजूद वह बार-बार विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के साथ चुनावी समझौता करना चाहते हैं।
पटना में राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि ओवैसी को अपने राजनीतिक विचार जाहिर करने का हक है, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अन्य पार्टियों को प्रतिनिधित्व के बारे में बात करने के अधिकार से वंचित किया जाना चाहिए।
झा ने कहा कि भारत की राजनीतिक और बौद्धिक परंपराओं में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद और डॉ. बीआर आंबेडकर जैसे नेताओं के लिए खास जगह रही है।
उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, “भारत में कभी कोई एक विचारधारा नहीं रही। यहां कभी सोचने का भी कोई एक तरीका नहीं रहा। यही भारत की बहुलवादी सोच है।”
दिल्ली में कांग्रेस नेता उदित राज ने ओवैसी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तरह ही समाज को बांटने वाला विमर्श फैलाने का आरोप लगाया।
राज ने कहा, “भाजपा हिंदुओं की ठेकेदार बन रही है और वह (ओवैसी) मुसलमानों के ठेकेदार बन रहे हैं। ये दोनों ही सांप्रदायिक ताकतें हैं और इनसे सावधान रहने की जरूरत है।”
भाषा
किशोर जफर पारुल
पारुल