बीड, 19 अक्टूबर (भाषा) महाराष्ट्र के बीड जिले में करीब एक सदी बाद एक बाघ देखा गया है, जो टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य से कई जिलों का लंबा सफर तय करके यहां पहुंचा। वन विभाग के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
रेंज वन अधिकारी अमोल मुंडे ने बताया कि चार साल का यह बाघ अगस्त में आष्टी तहसील के ब्रह्मगांव वन क्षेत्र में कैमरा ‘ट्रैप’ में रिकॉर्ड हुआ था जिसके बाद वह पाटोदा तहसील की ओर बढ़ गया।
उन्होंने बताया कि यह बाघ 2023 में यवतमाल जिले के टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य से निकला था।
मुंडे ने कहा कि वह चंद्रपुर, धाराशिव, लातूर और अहिल्यानगर जिलों से गुजरने के बाद बीड पहुंचा और यहां 20 अगस्त को ब्रह्मगांव वन क्षेत्र में कैमरा ट्रैप में उसकी गतिविधियां दर्ज की गईं।
मुंडे ने बताया कि कैमरा ट्रैप से हाल में जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में यह बाघ आष्टी और पाटोदा तहसीलों के जंगलों में टहलता रहा। बाद में वह सोलापुर जिले में बार्शी के पास करी क्षेत्र की ओर बढ़ गया।
अधिकारी ने बताया कि यह घटना महत्वपूर्ण है, क्योंकि 1910 और 1920 के दशक के बाद पहली बार आष्टी और पाटोदा के वन क्षेत्रों में बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि बाघ अनुकूल क्षेत्र मिलने पर वहां अपना ठिकाना बना लेते हैं।
मुंडे ने बताया कि आष्टी, पाटोदा और बीड तहसीलों के कुछ हिस्सों में बाघ जैसे बड़े जंगली जानवरों के आने-जाने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं।
वन विभाग के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि बाघ आमतौर पर मानव बस्तियों से दूरी बनाए रखते हैं और फिलहाल स्थानीय निवासियों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
हालांकि, एहतियात के तौर पर वन विभाग ने एक परामर्श जारी किया है, जिसमें ग्रामीणों और पशुपालकों से कहा गया है कि वे घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में जाने से बचें, जहां बाघ की आवाजाही देखी गई है।
मुंडे ने लोगों से सतर्क रहने, सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने और निगरानी करने वाली टीम का सहयोग करने की अपील की।
भाषा जोहेब खारी
खारी