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गुरुग्राम के अस्पताल में दुर्लभ दोहरी गर्भावस्था वाली आईवीएफ मरीज की आपात सर्जरी हुई

नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) हरियाणा के गुरुग्राम के एक अस्पताल के चिकित्सकों ने दुर्लभ दोहरी गर्भावस्था वाली 32 वर्षीय एक महिला की सफलतापूर्वक सर्जरी की।

महिला इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के बाद गर्भवती हुई थी। 11 सप्ताह की गर्भवती महिला में ‘हेटेरोटोपिक’ गर्भावस्था का पता चला था। उसके गर्भाशय के भीतर एक और गर्भावस्था जारी थी। हालांकि गर्भाशय के बाहर विकसित हो रहे गर्भ के फट जाने से स्थिति गंभीर हो गई थी।

‘हेटेरोटोपिक’ गर्भावस्था एक बहुत ही दुर्लभ और जटिल स्थिति है जिसमें दो गर्भधारण एक ही समय में होते हैं-एक गर्भाशय के अंदर और दूसरा गर्भाशय के बाहर, अक्सर फैलोपियन ट्यूब में।

अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि चिकित्सकों ने ऑपरेशन करके फटी हुई फैलोपियन ट्यूब को हटा दिया और गर्भाशय के भीतर पल रहे गर्भ को सुरक्षित रखा।

‘आर्टेमिस’ अस्पताल ने बताया कि गर्भ फटने के कारण महिला के पेट में लगभग 800 मिलीलीटर रक्त और थक्के जमा हो गए थे जिसके कारण आपातकालीन सर्जरी आवश्यक हो गई थी।

अस्पताल के अनुसार आम आबादी में गर्भावस्था के लगभग 30,000 मामलों में से एक मामले में ऐसी स्थिति देखने को मिलती है। हालांकि, आईवीएफ जैसी सहायक प्रजनन तकनीक के जरिए गर्भधारण करने वाली महिलाओं में इसके मामले अधिक देखे जाते हैं।

चिकित्सकों ने आपातकालीन लैप्रोस्कोपिक सर्जरी करके फटी हुई दाईं फैलोपियन ट्यूब को निकाला और पेट के अंदर जमा हुए खून और थक्कों को बाहर निकाला।

सर्जरी में शामिल चिकित्सकों की टीम ने सावधानीपूर्वक फटी हुई ट्यूब को निकाला, रक्तस्त्राव को नियंत्रित किया और गर्भाशय को कम से कम छेड़ा।

गुरुग्राम के आर्टेमिस अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. रेनू सहगल ने बताया, ‘‘हेटेरोटोपिक गर्भावस्था में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि गर्भाशय के अंदर पल रहे गर्भस्थ शिशु को सुरक्षित रखते हुए गर्भाशय के बाहर (एक्टोपिक) वाली गर्भावस्था का इलाज किया जाए।’’

उन्होंने बताया कि यह मामला इसलिए भी काफी जटिल था क्योंकि मरीज पहले से ही 11 सप्ताह की गर्भवती थी; इस अवस्था में गर्भाशय काफी बड़ा हो जाता है और ट्यूब में होने वाली प्रेगनेंसी भी काफी विकसित हो चुकी होती है।

डॉ. सहगल ने कहा, ‘‘अगर ट्यूब में मौजूद गर्भाशय फट जाए तो बहुत तेज रक्तस्त्राव हो सकता है और तुरंत सर्जरी की जरूरत पड़ती है।’’

मरीज की स्थिति काफी बेहतर है और उसे स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मौजूदा गर्भावस्था की निगरानी के लिए समय-समय पर जांच और अल्ट्रासाउंड स्कैन कराने की सलाह दी गई है।

भाषा सुरभि

खारी

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