अलप्पुझा, 19 अक्टूबर (भाषा) केरलम के अलप्पुझा और कोट्टायम जिलों को जोड़ने वाले मक्केकडावु-नेरे कडावु पुल का श्रेय लेने को लेकर विवाद के बीच निर्दलीय विधायक एवं पूर्व लोक निर्माण मंत्री जी. सुधाकरन ने सोमवार को पिनराई विजयन नीत पहली सरकार के कार्यकाल में इस परियोजना की शुरुआत कराने में अपनी भूमिका का ब्योरा दिया।
मुख्यमंत्री वी. सतीशन ने रविवार को दोनों जिलों को जोड़ने वाले 800 मीटर लंबे और 11 मीटर चौड़े पुल का उद्घाटन किया।
लोक निर्माण मंत्री पी. के. बशीर और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पूर्व सांसद ए. एम. आरिफ के बीच उद्घाटन समारोह के दौरान पुल का श्रेय लेने को लेकर बहस के बाद यह विवाद शुरू हुआ।
सुधाकरन ने 2016 से 2021 तक वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार में लोक निर्माण मंत्री के रूप में कार्य किया था।
उन्होंने इस साल माकपा छोड़ दी और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अंबलपुझा विधानसभा सीट से जीत हासिल की।
सुधाकरन ने ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में पुल को बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना बताते हुए कहा कि इससे अलप्पुझा और कोट्टायम जिलों के लोगों को यात्रा संबंधी परेशानियों से काफी राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि पुल का उद्घाटन एक भव्य समारोह में किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री, लोक निर्माण मंत्री, स्थानीय विधायक और अन्य लोग शामिल हुए।
विधायक ने कहा कि समारोह में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से इस परियोजना के प्रति जनता का लगाव स्पष्ट था।
सुधाकरन ने कहा, ‘‘पिनराई विजयन नीत पहली सरकार के कार्यकाल में जब मैं लोक निर्माण मंत्री था, तब मैंने कोट्टायम के वैकोम क्षेत्र और अलप्पुझा के कुछ हिस्सों का दौरा किया था। इसके बाद पुल के लिए करीब 80 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। पुल की आधारशिला वैकोम की ओर रखी गई थी।’’
उन्होंने कहा कि मूल योजना पुल का निर्माण पूरा होने के बाद अलप्पुझा की ओर से इसका उद्घाटन करने की थी।
हालांकि, संपर्क मार्ग के निर्माण के लिए इलाके के एक-दो परिवारों द्वारा जमीन देने से इनकार किए जाने के कारण पुल का निर्माण कार्य विलंबित हो गया।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने यह भी फैसला किया कि जमीन मालिकों को अपनी जमीन देने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। इसके परिणामस्वरूप निर्माण कार्य में देरी हुई।’’
भाषा जितेंद्र वैभव
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