Breaking News

टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के एक संदिग्ध को कोटा से हिरासत में लिया गया     |   हैदराबाद के पास सड़क हादसा, खड़ी लॉरी से टकराई RTC बस, 15 घायल     |   कनाडाई सैन्य अड्डे पर घास में लगी आग, 4 लोगों की मौत     |   तेल अवीव-वियना फ्लाइट को मिली बम से उड़ाने की धमकी, बुल्गारिया में कराई गई इमरजेंसी लैंडिंग     |   भारत छोड़ने के नोटिस को इमरान खान ने दी चुनौती, बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई आज     |  

आईपीएस अधिकारी ने राजद सांसद सुधाकर सिंह को मानहानि का नोटिस भेजा

पटना, 19 अक्टूबर (भाषा) बिहार में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के एक वरिष्ठ अधिकारी की ओर से मानहानि का नोटिस भेजे जाने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

बक्सर से सांसद सिंह ने बिरला को भेजे पत्र का स्क्रीनशॉट फेसबुक पेज पर साझा किया। इससे कुछ दिन पहले उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक ‘खुला पत्र’ लिखकर पूछा था कि क्या विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के महानिदेशक कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए नोटिस को राज्य सरकार की “मंजूरी” हासिल है।

कृष्णन की ओर से एक विधि फर्म के जरिये भेजे गए नोटिस में सिंह से जून में एक संवाददाता सम्मेलन और पिछले महीने एक समाचार पोर्टल को दिए गए साक्षात्कार के दौरान आईपीएस अधिकारी के खिलाफ की गई टिप्पणियों के लिए माफी मांगने को कहा गया है।

नोटिस में कहा गया है कि अगर सिंह निर्धारित समयसीमा के भीतर माफी नहीं मांगते हैं, तो उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर पांच करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की जाएगी।

राजद नेता और बिहार के पूर्व मंत्री सिंह ने बिरला से आग्रह किया कि वह इस बात की जांच कराने का निर्देश दें कि कहीं यह नोटिस संसद सदस्य के रूप में उनके कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालने का प्रयास तो नहीं है।

सिंह ने कहा, “अगर ऐसा पाया जाता है, तो कार्रवाई के लिए मामला विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि नोटिस का एक अन्य गंभीर पहलू यह है कि उसकी भाषा और अवधि से ऐसा प्रतीत होता है कि निजी विधि फर्म ने राज्य सरकार के वकील की भूमिका निभाई है।

सिंह ने कहा, “संविधान के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से केवल महाधिवक्ता या राज्य द्वारा नियुक्त अन्य विधि अधिकारी ही ऐसा कर सकते हैं। इस संबंध में लोकसभा सचिवालय को बिहार सरकार से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि संसद की गरिमा और उसके सदस्यों की स्वतंत्रता के संरक्षक के रूप में आप (बिरला) इस मामले की गंभीरता को समझेंगे और उचित कार्रवाई करेंगे।”

भाषा

कैलाश पारुल

पारुल