नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा ने सोमवार को आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी मामले में ‘वीआईपी’ के तौर पर दुष्यंत कुमार गौतम का नाम सामने आने के बावजूद उनसे पूछताछ नहीं की गई और अब उन्हें राजभवन में बैठाया गया है, ताकि उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न हो सके।
गौतम ने आज सिक्किम के राज्यपाल के तौर पर शपथ ली। उन्होंने अंकित भंडारी मामले में लगे आरोपों को खारिज किया है।
कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी सैलजा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि सिक्किम के राजभवन में ऐसे व्यक्ति को बैठाया जा रहा है, जिसका नाम एक ‘‘बहुत बड़े स्कैंडल’’ से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘‘अंकिता भंडारी मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया, लेकिन उसे आज तक इंसाफ नहीं मिला। इस मामले में भाजपा के लोगों के ऑडियो सामने आए और वीआईपी का नाम भी आया।’’
कांग्रेस नेता ने मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘हमें यह झुनझुना थमाया जाता है कि सीबीआई जांच कर रही है, लेकिन सीबीआई ने कभी भी इस मामले के सभी पहलुओं की जांच नहीं की।’’
सैलजा ने कहा, ‘‘वीआईपी के तौर पर जिस दुष्यंत गौतम का नाम आया, उनसे पूछताछ ही नहीं हुई। उल्टा उन्हें राजभवन में बैठाया जा रहा है, ताकि कोई कानूनी कार्रवाई न हो सके।’’
उत्तराखंड की 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी। वह ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया और वे उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
अंकिता के माता-पिता ने गौतम की नियुक्ति के खिलाफ बुधवार को इंडिया गेट पर धरना दिया था और उन्हें बृहस्पतिवार तड़के हिरासत में ले लिया गया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य कांग्रेस नेताओं ने इंडिया गेट पहुंचकर अंकिता के माता-पिता के प्रति अपना समर्थन जताया था।
अंकिता के माता-पिता का आरोप है कि हत्याकांड में जिस कथित ‘‘वीआईपी’’ की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं, वह गौतम हैं। सितंबर 2022 में हुए इस हत्याकांड के समय गौतम भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी थे।
भाषा हक हक मनीषा
मनीषा