कोच्चि, 19 अक्टूबर (भाषा) केरलम उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने कहा है कि दृष्टिबाधित लोगों को सहानुभूति की नहीं, बल्कि ऐसे समाज की जरूरत है जो उनकी स्वतंत्रता का सम्मान करे और उनके जीवन में बाधाएं पैदा करना बंद करे।
उन्होंने रविवार को कक्कनाड के इन्फोपार्क में रोटरी क्लब ऑफ कोचीन ग्लोबल द्वारा आयोजित 'व्हाइट केन डे' (श्वेत छड़ी दिवस) समारोह का उद्घाटन करते हुए दृष्टिबाधित लोगों के पैदल चलने के लिए बनाए गए फुटपाथों और स्पर्शनीय मार्गों के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की आलोचना की।
उन्होंने कहा, “जो लोग देखने में सक्षम होने का दावा करते हैं, वे अंधे हैं। उन्हें फुटपाथ, पैदल चलने के रास्ते या पैदल यात्री पारपथ दिखाई नहीं देते।” उन्होंने कहा कि पैदल चलने वालों की सुविधाएं बहाल करने के लिए उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बावजूद वाहनों का रास्तों पर कब्जा जारी है।
उन्होंने कहा, “जिस शहर में आप पैदल नहीं चल सकते, वह शहर ही नहीं है।”
समारोह से पहले आंखों पर पट्टी बांधकर श्वेत छड़ी के साथ पैदल चलने के अपने अनुभव को याद करते हुए न्यायमूर्ति रामचंद्रन ने कहा कि वे तीन-चार मिनट उनके जीवन के सबसे कठिन क्षणों में से थे।
उन्होंने सुझाव दिया कि वाहन चालकों, विशेषकर बस चालकों को भी ऐसे अभ्यासों से गुजरना चाहिए, ताकि वे दृष्टिबाधित पैदल यात्रियों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझ सकें।
उन्होंने कहा, “हम उन्हें निर्भर बनाते हैं और फिर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का श्रेय लेते हैं। बदलाव हमें करना है।” उन्होंने समाज से आग्रह किया कि वह दिव्यांगजनों से बहुसंख्यक लोगों के लिए बनाई गई व्यवस्थाओं के अनुकूल होने की अपेक्षा करने के बजाय सभी को साथ लेकर चलने वाले सार्वजनिक स्थानों का निर्माण करे।
समारोह में रोटरी क्लब ऑफ कोचीन ग्लोबल की पहल ‘प्रोजेक्ट सूर्य’ को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इसके तहत दृष्टिबाधित लोगों को कंप्यूटर, सहायक तकनीक, आवागमन, संचार और जीवन कौशल का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है।
'प्रोजेक्ट सूर्य' के संस्थापक न्यासी रोटेरियन नोबी ई ए ने कहा कि इस पहल के माध्यम से बुनियादी पाठ्यक्रम के 20 बैचों, 45 ऑनलाइन बैचों और जागरूकता कार्यशालाओं के जरिए 2,000 से अधिक दृष्टिबाधित लोगों तक पहुंच बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि इसके लगभग 80 प्रतिशत पूर्व प्रशिक्षु सरकारी कार्यालयों, निजी कंपनियों, सूचना प्रौद्योगिकी पार्कों और गैर-सरकारी संगठनों में कार्यरत हैं।
आयोजकों के एक बयान में कहा गया कि रोटेरियन जॉर्ज मैथ्यू की पहल पर 2008 में इन्फोपार्क की विस्मया इमारत में सात विद्यार्थियों के साथ शुरू किए गए इस कार्यक्रम को सोसाइटी फॉर रिहैबिलिटेशन ऑफ विजुअली चैलेंज्ड, इन्फोपार्क और बेंगलुरु स्थित एनेबल इंडिया के सहयोग से विकसित किया गया।
2015 में इसका नाम बदलकर प्रोजेक्ट सूर्य कर दिया गया और 2017 में प्रत्येक बैच में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाकर 15 कर दी गई। यहां पात्र उम्मीदवारों को रहने की सुविधा, यात्रा में सहायता और अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है।
रोटरी क्लब ऑफ कोचीन ग्लोबल के अध्यक्ष डॉ. जॉन टी. जॉन ने कहा कि क्लब की योजना डिजिटल कौशल प्रशिक्षण का विस्तार करने, नई सहायक तकनीकों को शुरू करने, नियोक्ताओं के साथ साझेदारी मजबूत करने और ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की है।
भाषा तान्या वैभव
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