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‘पेटा इंडिया’ ने पशुओं पर प्रयोगों से जुड़े केंद्र के मसौदा नियमों को वापस लेने की मांग की

तिरुवनंतपुरम, 19 अक्टूबर (भाषा) पशु अधिकार संगठन ‘पेटा इंडिया’ ने जानवरों पर प्रयोगों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नियमों को वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे पशुओं का मौजूदा संरक्षण कमजोर हो सकता है।

पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (पेटा इंडिया) ने कहा कि ‘पशु क्रूरता निवारण (प्रयोगशाला में पशुओं पर प्रयोग, प्रजनन और व्यापार का नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण) नियम, 2026’ का मसौदा प्रयोगशालाओं में पशुओं की पीड़ा बढ़ा सकता है।

पशु अधिकार संगठन का दावा है कि इन प्रस्तावित नियमों के तहत वैज्ञानिक आधार और कानूनी अनुमति होने पर ‘वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972’ के अंतर्गत संरक्षित पशुओं को पकड़कर उन पर प्रयोग किए जा सकते हैं।

संगठन ने यह भी कहा कि इन नियमों के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में आवारा कुत्तों और बिल्लियों पर प्रयोग करने की छूट भी दी जा सकती है।

‘पेटा इंडिया’ ने दावा किया कि इन मसौदा नियमों से स्वतंत्र निगरानी और पशु कल्याण के लिए मौजूदा सुरक्षा उपाय कमजोर हो जाएंगे।

उसने कहा, ‘‘मसौदे के तहत संस्थागत नैतिकता समितियों को कुत्तों, घोड़ों, सूअरों और मवेशियों जैसे बड़े पशुओं पर हल्के या मध्यम स्तर के प्रयोगों को मंजूरी देने की अनुमति होगी। इसके लिए पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण संबंधी केंद्रीय समिति (सीसीएसईए) की पूर्व मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा।’’

‘पेटा इंडिया’ ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अब ऐसी तकनीकों और तरीकों की ओर झुकाव बढ़ रहा है जिनमें जानवरों का इस्तेमाल नहीं होता। इसलिए इन प्रस्तावित नियमों का ध्यान ‘‘जानवरों पर प्रयोग के लिए नए रास्ते खोलने या मौजूदा सुरक्षा उपायों को कमजोर करने के बजाय वैज्ञानिक रूप से उन्नत ऐसी तकनीकों के इस्तेमाल और जानवरों के कल्याण की सुरक्षा’’ पर होना चाहिए।

पशु अधिकार संगठन ने कहा, ‘‘पेटा इंडिया प्रस्तावित नियमों को वापस लेने की मांग करता है और ऐसे सख्त नियम बनाने का आग्रह करता है जो वन्यजीवों और सामुदायिक पशुओं की रक्षा करें, स्वतंत्र निगरानी और मौजूदा सुरक्षा उपायों को बरकरार रखें तथा वैज्ञानिक रूप से विश्वसनीय पशु-रहित तरीकों को प्राथमिकता दें।’’

भाषा सुरभि अमित

अमित