Breaking News

टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के एक संदिग्ध को कोटा से हिरासत में लिया गया     |   हैदराबाद के पास सड़क हादसा, खड़ी लॉरी से टकराई RTC बस, 15 घायल     |   कनाडाई सैन्य अड्डे पर घास में लगी आग, 4 लोगों की मौत     |   तेल अवीव-वियना फ्लाइट को मिली बम से उड़ाने की धमकी, बुल्गारिया में कराई गई इमरजेंसी लैंडिंग     |   भारत छोड़ने के नोटिस को इमरान खान ने दी चुनौती, बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई आज     |  

पश्चिम बंगाल में पूजा पंडालों में सुबह-सुबह अंजलि के साथ महाष्टमी मनाई गई

कोलकाता, 19 अक्टूबर (भाषा) पश्चिम बंगाल में महाष्टमी के अवसर पर सोमवार सुबह-सुबह कोलकाता और राज्य के विभिन्न स्थानों पर दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने इस साल अनुष्ठानों के लिए निर्धारित समय के अनुसार मां दुर्गा को पुष्पांजलि अर्पित की।

महानगर के सामुदायिक पूजा पंडालों से लेकर जिलों में पारंपरिक घरेलू आयोजनों और ऐतिहासिक मंदिरों तक, श्रद्धालु नए उत्सवी परिधान पहनकर पंडालों में पहुंचे। इस दौरान पुजारियों ने मां दुर्गा की स्तुति में मंत्रों और भजनों का पाठ किया।

महाष्टमी पर सुबह जल्दी पूजा शुरू होने के कारण कई पूजा स्थलों पर तड़के ही श्रद्धालु जुटने लगे। परिवार मां दुर्गा का आशीर्वाद लेने पहुंचे, जहां बच्चे अपने माता-पिता के साथ आए और बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने युवा पीढ़ी के साथ मिलकर अनुष्ठानों में हिस्सा लिया।

हालांकि, उत्तर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा मंडप में दो दिन पहले हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत के बाद माहौल गमगीन रहा। वहां आमतौर पर दिखने वाला उत्सवी उल्लास मातम में बदल गया। स्थानीय महिलाओं और बच्चों ने इस त्रासदी पर दुख जताया।

कई स्थानीय निवासियों ने कहा कि वे इस साल मंडप में अंजलि देने से हिचकिचा रहे थे और इससे वर्षों से चली आ रही उनकी परंपरा टूट सकती है।

रामकृष्ण मठ और मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ में सुबह से ही श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना लगा रहा। वहीं, स्थापित परंपराओं के अनुरूप कामारपुकुर में भी विशेष अनुष्ठान किए गए।

हुगली जिले का कामारपुकुर रामकृष्ण परमहंस की जन्मस्थली है।

कई पूजा स्थलों पर कुमारी पूजा का आयोजन किया गया, जिसमें एक छोटी बच्ची को दिव्य स्त्री शक्ति के स्वरूप में पूजा जाता है।

उत्तर बंगाल के कूचबिहार में कोच राजवंश के इतिहास और शाही परंपराओं से गहराई से जुड़ी बोरो देवी की सदियों पुरानी पूजा के तहत श्रद्धालुओं ने सुबह-सुबह मंदिर में महाष्टमी की अंजलि अर्पित की।

पांच सौ साल से भी अधिक समय से चली आ रही यह पूजा इस क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है। अष्टमी पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनमें रात के समय होने वाली ‘गुप्त पूजा’ भी शामिल है।

महाष्टमी से महानवमी में प्रवेश के समय होने वाला महत्वपूर्ण अनुष्ठान संधि पूजा के रूप में पूरे राज्य में किया गया।

इस अनुष्ठान में परंपरागत रूप से देवी के चामुंडा स्वरूप की आराधना करते हुए 108 कमल पुष्प अर्पित किए जाते हैं और 108 दीप जलाए जाते हैं।

भाषा तान्या वैभव

वैभव