लखनऊ, 18 अक्टूबर (भाषा) उत्तर प्रदेश सरकार प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि कम करने के लिए महाराष्ट्र के पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के सहयोग से पांच जिलों में आकाशीय बिजली का पता लगाने वाले सेंसर स्थापित कर रही है। रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
बयान के अनुसार, एटा, मेरठ, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी और सोनभद्र में लगाए जा रहे ये सेंसर आकाशीय बिजली गिरने की गतिविधियों का तेजी से पता लगाने और समय रहते चेतावनी जारी करने में मदद करेंगे।
इससे लोगों को सतर्क करने और संभावित हादसों से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाने का समय मिल सकेगा।
राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, इस पहल का मुख्य उद्देश्य आकाशीय बिजली से होने वाली जनहानि कम करना और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को अधिक प्रभावी बनाना है।
बयान के मुताबिक, बारिश के मौसम में खेतों में काम करने वाले किसानों, खुले स्थानों पर काम करने वाले मजदूरों, ग्रामीणों और पशुपालकों को आकाशीय बिजली गिरने का अधिक खतरा रहता है।
बयान में बताया गया कि समय पर चेतावनी मिलने से वे सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकेंगे और इससे स्थानीय प्रशासन व आपदा प्रबंधन एजेंसियों को भी जरूरी एहतियाती कदम उठाने में मदद मिलेगी।
बयान के मुताबिक, प्रदेश में आपदा प्रबंधन की रणनीति के तहत घटना के बाद राहत पहुंचाने के साथ-साथ संभावित खतरे का पहले पता लगाने और नुकसान रोकने पर भी जोर दिया जा रहा है।
बयान में बताया गया कि आकाशीय बिजली की चेतावनी देने वाले सेंसर मौसम की निगरानी को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।
भाषा आनन्द जितेंद्र
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