कोलकाता, 18 अक्टूबर (भाषा) पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के विशाल पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने रविवार को कोलकाता के सामुदायिक दुर्गा पूजा पंडालों का निरीक्षण शुरू किया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार शाम उत्तर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद इस समिति के गठन की घोषणा की थी।
इस हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 25 घायल हो गए थे।
इस समिति में आपदा प्रबंधन सचिव राजेश कुमार सिंह, अग्निशमन सेवा के महानिदेशक अनुज शर्मा और एसटीएफ के डीजीपी जावेद शमीम शामिल हैं।
समिति के सदस्यों ने सियालदह स्टेशन के निकट स्थित संतोष मित्रा स्क्वायर से अपना दौरा शुरू किया। समिति के सदस्यों ने यहां प्रवेश और निकास द्वारों के साथ-साथ प्रकाश व्यवस्था का भी निरीक्षण किया।
सूत्रों के अनुसार, समिति के सदस्य सुरक्षा मानकों और भीड़ प्रबंधन योजनाओं की समीक्षा करने के लिए कोलकाता के कई उन दुर्गा पूजा पंडालों में जायेंगे, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
शर्मा ने बाद में पत्रकारों से कहा कि पूजा आयोजक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सहयोग कर रहे हैं।
उन्होंने उत्तर कोलकाता में एक दुर्गा पूजा पंडाल का दौरा करने के बाद कहा, “हर कोई चाहता है कि दुर्गा पूजा का त्योहार उचित तरीके से आयोजित हो।’’
शर्मा ने कहा कि समिति ने फैसला किया है कि पूजा पंडालों के प्रवेश और निकास द्वारों के पास खाने-पीने के स्टॉल नहीं लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, किसी भी पूजा पंडाल में वीआईपी लोगों के लिए अलग से प्रवेश द्वार नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि इससे भीड़ बढ़ने की स्थिति में पूजा पंडालों में बाहर निकलने के लिए एक अतिरिक्त रास्ता उपलब्ध रहेगा।
प्रशासन ने निकास द्वारों को अधिक चौड़ा करने, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने और अस्थायी रस्सियों से की गई घेराबंदी के कारण पैदा होने वाली बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
भाषा
देवेंद्र नरेश
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