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जियो प्लेटफॉर्म्स की वृद्धि में एआई, ब्रॉडबैंड और विदेशी बाजारों की भूमिका: ब्रोकरेज कंपनियां

नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर (भाषा) दूरसंचार क्षेत्र में 5जी नेटवर्क का विस्तार लगभग पूरा होने के बाद रिलायंस समूह की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स अब कृत्रिम मेधा (एआई), घरों में ब्रॉडबैंड सेवा, उद्यमों को डिजिटल सेवाएं देने और अपनी प्रौद्योगिकी का विदेशों में इस्तेमाल बढ़ाने के जरिए कारोबार की अगली वृद्धि की तैयारी कर रही है। कई ब्रोकरेज कंपनियों ने इस सप्ताह खुलने वाले कंपनी के 30,213 करोड़ रुपये तक के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से पहले अपनी रिपोर्ट में यह कहा है।

इस बड़े आईपीओ में प्रति शेयर कीमत का दायरा 1,065 से 1,119 रुपये तय किया गया है। यह निर्गम 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए बोली 19 अक्टूबर को लगेगी।

सूत्रों के अनुसार, प्रमुख घरेलू और वैश्विक संस्थागत निवेशकों ने जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की दिलचस्पी दिखाई है।

सूत्रों ने बताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स के मौजूदा निवेशक अबू धाबी निवेश प्राधिकरण (एडीआईए) ने भी आईपीओ में संस्थागत निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्से में निवेश की रुचि दिखाई है। हालांकि, इसकी स्वतंत्र रूप से तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी।

उनके मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स ने शनिवार को ब्रोकरों और विश्लेषकों के साथ आईपीओ से पहले की बैठकों का दूसरा दौर आयोजित किया। इसमें कंपनी के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी और निदेशक ईशा अंबानी ने कंपनी की वृद्धि की योजनाओं की जानकारी दी। इससे पहले बृहस्पतिवार को बैठक का पहला दौर हुआ था।

सूत्रों ने बताया कि आईपीओ को लेकर खुदरा निवेशकों और कर्मचारियों में भी दिलचस्पी बढ़ी है। कुछ ब्रोकरेज मंचों पर आईपीओ के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कर्मचारियों ने भी आईपीओ में निवेश को लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जो इस पेशकश में उनकी मजबूत दिलचस्पी को दर्शाता है।

एमके ग्लोबल ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “कंपनी की खुद विकसित प्रौद्योगिकी प्रणाली जियो प्लेटफॉर्म्स को वृद्धि के नए अवसर देती है।”

उसने कहा कि जियो ने भारत में विकसित संपूर्ण 5जी प्रौद्योगिकी प्रणाली समेत कई क्षमताएं तैयार की हैं। इसमें 4जी और 5जी के संयुक्त कोर नेटवर्क, 5जी उपकरण तथा अपने स्तर पर विकसित परिचालन सहायता प्रणाली (ओएसएस) और व्यावसायिक सहायता प्रणाली (बीएसएस) शामिल हैं।

ब्रोकरेज कंपनी ने जियो की बाजार में अग्रणी स्थिति, कीमतें तय करने की क्षमता, वृद्धि के अवसरों और योजनाओं को लागू करने के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए आईपीओ में निवेश की सिफारिश की है।

एमके ग्लोबल ने प्रमुख जोखिमों में स्पेक्ट्रम की लागत और नियामकीय बदलाव, प्रतिस्पर्धा के कारण प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) पर दबाव तथा ग्राहकों के कंपनी छोड़ने की आशंका, रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों पर निर्भरता, कुछ बुनियादी ढांचा और उपकरण आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता तथा कर्ज और विदेशी मुद्रा से जुड़े जोखिमों को गिनाया है।

जीईपीएल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जियो की स्वदेशी स्वतंत्र 5जी नेटवर्क प्रणाली, उसकी अपनी जियोब्रेन एआई प्रणाली और 6जी अनुसंधान, क्लाउड आधारित नेटवर्क ढांचे तथा एआई के जरिये नेटवर्क संचालन को स्वचालित बनाने में निवेश से उसे तकनीकी बढ़त मिलती है। इससे उद्यमों के लिए समाधान तैयार करने और विदेशी बाजारों में अपनी क्षमताओं से कमाई करने के अवसर पैदा हो सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, “कुल मिलाकर, जियो प्लेटफॉर्म्स को 5जी के बढ़ते इस्तेमाल, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के विस्तार, उद्यमों के डिजिटल बदलाव और एआई आधारित सेवाओं से लाभ मिलने की स्थिति में रखा गया है। अपनी प्रौद्योगिकी पर स्वामित्व, बड़े ग्राहक आधार, विविध डिजिटल सेवाओं और मजबूत मुनाफे के कारण कंपनी की वृद्धि टिकाऊ रह सकती है।”

एसबीआई सिक्योरिटीज ने कहा कि जियो अपनी प्रौद्योगिकी प्रणाली, 5जी में मजबूत स्थिति और स्पेक्ट्रम की व्यापक उपलब्धता के दम पर खुद को केवल दूरसंचार संपर्क सेवाएं देने वाली कंपनी के बजाय एक प्रौद्योगिकी मंच के रूप में स्थापित कर रही है।

ब्रोकरेज के अनुसार, कंपनी को मोबाइल शुल्क में युक्तिसंगत बदलाव, 2जी ग्राहकों के 4जी और 5जी की ओर आने, घरेलू ब्रॉडबैंड और उद्यमों में डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से वृद्धि मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, एआई, उपग्रह सेवाओं और विदेशों में अपनी प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से भी आय बढ़ाने के अवसर हैं।

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय