Breaking News

टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के एक संदिग्ध को कोटा से हिरासत में लिया गया     |   हैदराबाद के पास सड़क हादसा, खड़ी लॉरी से टकराई RTC बस, 15 घायल     |   कनाडाई सैन्य अड्डे पर घास में लगी आग, 4 लोगों की मौत     |   तेल अवीव-वियना फ्लाइट को मिली बम से उड़ाने की धमकी, बुल्गारिया में कराई गई इमरजेंसी लैंडिंग     |   भारत छोड़ने के नोटिस को इमरान खान ने दी चुनौती, बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई आज     |  

सीजेआई ने लेह, करगिल के वकीलों के लिए न्यायालय तक डिजिटल पहुंच की घोषणा की

लेह, 18 अक्टूबर (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि लेह और करगिल के वकील जल्द ही उच्च न्यायालय की लद्दाख पीठ के जरिए डिजिटल माध्यम से उच्चतम न्यायालय तक पहुंच सकेंगे।

जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय की लद्दाख पीठ का उद्घाटन करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि लद्दाख से जुड़े सभी मामलों को एक ही दिन सूचीबद्ध किया जाएगा और उनकी सुनवाई वीडियो-कॉन्फ्रेंस के जरिए होगी। इससे वकीलों और मुकदमों से जुड़े लोगों को दिल्ली तक यात्रा करने में लगने वाले समय, खर्च और परेशानी से राहत मिलेगी।

इस उद्घाटन को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए, सीजेआई ने 1870 में लेह में एक विशेष अदालत की स्थापना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भले ही वह संस्था अब इतिहास का हिस्सा बन चुकी है, लेकिन भौगोलिक चुनौतियां, जो न्याय तक पहुंच को सीमित करती थीं, कई पीढ़ियों तक बनी रहीं।

उन्होंने कहा, “लगभग एक सदी तक, लद्दाख के लिए काम करने वाला उच्च न्यायालय महान हिमालय के उस पार स्थित था, जहां सर्दियों में केवल हवाई मार्ग से ही पहुंचा जा सकता था।”

सीजेआई ने कहा कि 2019 में लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद, उच्च न्यायालय में ‘लद्दाख’ नाम को शामिल करना एक महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन यह पहल काफी हद तक केवल प्रतीकात्मक ही रही।

उन्होंने कहा, “अदालत के लेटरहेड पर नाम होना और किसी की दरवाजे पर अदालत का होना, दोनों एक जैसी बातें नहीं हैं।”

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया कि यह पीठ केंद्र शासित प्रदेश के दोनों जिलों—लेह और कारगिल—की समान रूप से है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब लद्दाख के हर कोने में रहने वाले लोग इस संस्थान को अपना मानने लगें।

उन्होंने यह भी कहा कि एक बार पीठ में वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा स्थापित होने के बाद, उच्चतम न्यायालय लद्दाख से जुड़े सभी मामलों को एक ही दिन सूचीबद्ध करेगा और डिजिटल माध्यम से उनकी लगातार सुनवाई करेगा।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि किसी अदालत का वास्तविक मापदंड उसकी भौगोलिक ऊंचाई नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए उसकी सुलभता है, जिनकी वह सेवा करती है।

उन्होंने कहा, “हम समुद्र तल से लगभग 3,500 मीटर ऊपर हैं, और मुझे बताया गया है कि हमारे देश में इससे अधिक ऊंचाई पर कभी किसी उच्च न्यायालय की पीठ नहीं स्थापित नहीं हुई है। बेशक, आज मायने यह नहीं रखता कि यह अदालत कितनी ऊंचाई पर स्थित है। महत्वपूर्ण यह है कि अब यह उन लोगों के कितने करीब है, जिनकी यह सेवा करती है।”

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश