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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने दुर्गा पूजा पंडालों में वीआईपी प्रवेश द्वार समाप्त करने के संकेत दिये

कोलकाता, 18 अक्टूबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा कि सरकार दुर्गा पूजा पंडालों में वीआईपी प्रवेश द्वार बनाने की परंपरा खत्म करने को अनिवार्य कर सकती है।

उन्होंने यहां भगदड़ की घटना में कई लोगों की मौत के बाद पंडालों में प्रवेश और निकास के लिए स्पष्ट एवं सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

पूजा आयोजक, खासकर बड़े बजट वाले और अधिक लोकप्रिय आयोजक, अक्सर पंडाल में वीआईपी के लिए विशेष प्रवेश की व्यवस्था करते हैं।

उत्तरी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार शाम बारिश के बीच अचानक भीड़ बढ़ने से भगदड़ मच गई थी, जिसमें कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 25 अन्य घायल हो गए।

शुभेंदु ने कहा कि कोलकाता और उसके उपनगरों की पूजा समितियों के साथ 26 अक्टूबर को सादगीपूर्ण तरीके से ‘विजया सम्मेलन’ आयोजित किया जायेगा। यह दुर्गा पूजा के बाद होने वाला पारंपरिक सांस्कृतिक मिलन समारोह है।

उन्होंने यहां राज्य पुलिस मुख्यालय में पत्रकारों से कहा कि इस बैठक में इस साल के अनुभवों को साझा किया जाएगा और ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए किये जाने वाले उपायों पर चर्चा की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समारोह में, भगदड़ में घायल हुए प्रत्येक व्यक्ति को मुआवजे के तौर पर पांच लाख रुपये का चेक दिया जायेगा।

शुभेंदु ने कहा कि शनिवार की घटना के तुरंत बाद एक विशेष टीम का गठन किया गया।

उन्होंने शनिवार देर रात कोलकाता के प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में व्यवस्थाओं की खामियों की जांच करने के लिए इस टीम के गठन का निर्देश दिया।

शुभेंदु ने कहा कि वह रविवार शाम कोलकाता पुलिस मुख्यालय के यातायात नियंत्रण कक्ष में मौजूद रहेंगे और पूरे शहर में भीड़ की आवाजाही पर नजर रखेंगे। उन्होंने कहा, “मैं चीजों को दूसरों से सुनकर नहीं, बल्कि अपनी आंखों से देखकर समझना चाहता हूं।’’

उन्होंने कहा कि भगदड़ के दौरान जान गंवाने वाले 19 लोगों में से 18 राज्य के विभिन्न हिस्सों के रहने वाले थे, जबकि एक व्यक्ति बिहार के मुजफ्फरपुर का निवासी था।

राज्य के सीआईडी मुख्यालय भवानी भवन में उच्चस्तरीय बैठक के बाद शुभेंदु ने कहा कि पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमने शव संबंधित परिजनों को सौंपने के लिए मजिस्ट्रेट और डीएसपी रैंक के अधिकारियों को नियुक्त किया है। अंतिम संस्कार पूरा होने तक ये अधिकारी मृतकों के परिवारों के साथ रहेंगे।’’

शुभेंदु ने कहा कि वह भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों से 20 और 21 अक्टूबर को मुलाकात करेंगे, उन्हें सांत्वना देंगे और 25-25 लाख रुपये की मुआवजा राशि के चेक सौंपेंगे।

इलाज करा रहे 25 लोगों के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा, “इनमें से 23 को मामूली चोटें आई हैं और उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है। दो घायल अब भी आईसीयू में हैं, लेकिन चिकित्सकों ने मुझे बताया है कि उनकी हालत खतरे से बाहर है।”

उन्होंने कहा, ‘‘मैं दो दिन में अधिक से अधिक परिवारों से संपर्क करने की कोशिश करूंगा। कोलकाता से 50 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले मृतकों के परिजनों के घरों तक मैं सड़क मार्ग से जाऊंगा। वहीं, इससे अधिक दूरी पर रहने वाले परिजनों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करूंगा, बशर्ते मौसम अनुकूल रहे।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी से कोलकाता पुलिस, कोलकाता नगर निगम (केएमसी) और दमकल विभाग के उन कर्मियों को बाहर रखा गया है, जिनकी भूमिका की जांच की जानी है।

शुभेंदु ने कहा कि मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल जल्द ही कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे को पत्र लिखकर एसआईटी की अध्यक्षता के लिए उच्च न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश को नियुक्त करने की अनुमति मांगेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘इस टीम में गृह विभाग के एक अधिकारी, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के प्रतिनिधि तथा राज्य के आपदा प्रबंधन सचिव शामिल हैं। यदि मुख्य न्यायाधीश अनुमति देते हैं, तो हम एसआईटी की अगुवाई के लिए उच्च न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश को नियुक्त करेंगे। अन्यथा, हम किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की सेवा लेंगे।”

भाषा

देवेंद्र सुभाष

सुभाष