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समस्त के एपी गुट ने वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर केरलम सरकार की आलोचना की

कोझिकोड, 18 अक्टूबर (भाषा) समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के कंथापुरम एपी अबूबकर मुस्लियार गुट ने वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर रविवार को केरलम सरकार की कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि सुन्नी समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है।

हालांकि, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन का समर्थन करते हुए कहा कि जिन गुटों को इसमें शामिल नहीं किया गया है, उन्हें अन्य निकायों में प्रतिनिधित्व मिल सकता है।

कंथापुरम एपी अबूबकर मुस्लियार के मुखपत्र और मलयाली अखबार ‘सिराज’ ने रविवार को ‘वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कपटपूर्ण है’ शीर्षक से संपादकीय प्रकाशित किया, जिसमें सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह वक्फ बोर्ड और हज समिति जैसे निकायों के पुनर्गठन में ‘समस्त’ को उचित प्रतिनिधित्व देने के अपने वादे से मुकर गई है।

केरलम सरकार ने शुक्रवार को केएस हमसा की अध्यक्षता वाले उस बोर्ड को भंग कर दिया, जिसका गठन पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने इस साल मार्च में किया था। बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने में अभी चार साल से ज्यादा का समय बचा था, फिर भी सरकार ने नौ सदस्यों वाला नया बोर्ड गठित कर दिया, जिसका प्रमुख आईयूएमएल नेता एमसी मायन हाजी को बनाया गया है।

नये बोर्ड के अन्य सदस्यों में आईयूएमएल नेता एवं विधायक कुरुक्कोली मोइदीन, मुस्तफा फैजी, सिरस डी कैप्सी, थोडियूर मुहम्मद कुंजू मौलवी, सजना फिरोज, जसीम सबाहा, डॉ. अब्दुल मजीद स्वालाही और सी मदीना बेगम शामिल हैं।

वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन की घोषणा के बाद से एपी गुट की ओर से आलोचना बढ़ गई है, क्योंकि उनके नेताओं को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि इस फैसले से सुन्नी समुदाय को ठेस पहुंची है और उनका अपमान हुआ है। इसमें कहा गया है कि केरलम में मुसलमानों के बीच सुन्नी समुदाय ही बहुसंख्यक है।

संपादकीय में सरकार पर राज्यभर में हजारों मस्जिदों, मदरसों और धार्मिक संस्थानों की स्थापना एवं प्रबंधन में ‘समस्त’ गुटों के योगदान को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया गया है।

इसमें बोर्ड में मुजाहिद और जमात-ए-इस्लामी संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने, जबकि ‘समस्त’ के दोनों गुटों को बाहर रखने पर भी सवाल उठाया गया है।

संपादकीय में कहा गया है कि कई वक्फ संपत्तियां सदियों पहले विशिष्ट धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए समर्पित की गई थीं। इसमें दावा किया गया है कि बोर्ड में सुधारवादी संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करना अनुचित है।

संपादकीय में कहा गया है, “वक्फ बोर्ड किसी राजनीतिक दल के हितों की रक्षा करने का जरिया नहीं है।” इसमें तर्क दिया गया है कि बोर्ड की मुख्य जिम्मेदारियां वक्फ संपत्तियों की रक्षा करना, उन पर कब्जे और दुरुपयोग को रोकना तथा यह सुनिश्चित करना है कि उनकी आय का इस्तेमाल उन्हीं उद्देश्यों के लिए हो, जिनके लिए ये संपत्तियां समर्पित की गई थीं।

संपादकीय में आईयूएमएल पर आरोप लगाया गया है कि उसने वक्फ बोर्ड में मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के बजाय उनकी अनदेखी की।

इसमें कहा गया है कि केरल मुस्लिम जमात और सुन्नी युवजन संघ (एसवाईएस) सहित सुन्नी संगठनों ने कथित अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई है और कानूनी रास्ते अपनाने तथा बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।

संपादकीय में कहा गया है कि 22 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर सरकार ने सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो विरोध और तेज किया जाएगा।

आईयूएमएल की केरलम इकाई के अध्यक्ष सैयद सादिक अली शिहाब थंगल ने वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन के फैसले का समर्थन किया।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि पुनर्गठित बोर्ड में सभी मुस्लिम संगठनों को प्रतिनिधित्व दिया गया है और जो लोग इसमें शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें सरकार की ओर से गठित किए जाने वाले अन्य निकायों में प्रतिनिधित्व देने पर विचार किया जा सकता है।

थंगल ने कहा, “हज समिति और मदरसा कल्याण कोष बोर्ड समेत अन्य निकायों का गठन किया जाना अभी बाकी है। जिन संगठनों को वक्फ बोर्ड में शामिल नहीं किया गया है, उन्हें इन निकायों में प्रतिनिधित्व देने पर विचार किया जाएगा।”

बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करने वाले सुन्नी संगठनों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने के आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड बिना किसी भेदभाव के सभी संगठनों की चिंताओं पर ध्यान देगा।

एपी गुट की इस शिकायत के बारे में पूछे जाने पर कि जमात-ए-इस्लामी को तो प्रतिनिधित्व दिया गया है, लेकिन उसके (एपी गुट) प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया है, थंगल ने कहा कि हज समिति के अध्यक्ष एपी सुन्नी गुट के ही प्रतिनिधि हैं और सरकार ने इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया है।

उन्होंने कहा, “पुनगर्ठित वक्फ बोर्ड में ‘समस्त’ से दो प्रतिनिधि शामिल हैं। एक तो खुद चेयरमैन हैं, जो ‘समस्त’ के प्रमुख लोगों में से एक हैं। मुस्तफा फैजी भी ‘समस्त’ का ही हिस्सा हैं।”

पुनर्गठन को अदालत में चुनौती दिए जाने के संबंध में थंगल ने कहा, “यह मामला पहले से ही अदालत के समक्ष विचाराधीन है। जिन्हें भी कोई शिकायत है, वे अदालत का रुख कर सकते हैं; अदालत को ही तय करने दें और मामले को आगे बढ़ाने दें।”

भाषा पारुल नरेश

नरेश